गढ़वा। प्रधानमंत्री किफायती आवास योजना (शहरी) के तहत गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र के 400 लाभुकों को अपना घर मिलने का इंतजार नौ साल बाद भी खत्म नहीं हुआ है। वर्ष 2018-19 में शुरू हुई इस योजना पर अब तक 9.09 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन किसी भी लाभुक को अब तक फ्लैट नहीं मिल सका है।
गढ़वा शहर के सोनपुरवा लाइन उस पार महुराम टोला में 400 किफायती आवास का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण की धीमी गति के कारण लाभुकों में नाराजगी है। कई लाभुक ऐसे हैं, जिन्होंने बैंक से ऋण लेकर नगर परिषद में अपना अंशदान जमा किया है। ऐसे लोगों पर किराए के मकान का खर्च और बैंक ऋण की किस्त, दोनों का बोझ पड़ रहा है।
2018-19 में शुरू हुआ था आवास निर्माण
प्रधानमंत्री किफायती आवास योजना (शहरी) की क्रियान्वयन एजेंसी जुडको है। योजना के लिए वर्ष 2017-18 में डीपीआर तैयार कर टेंडर की प्रक्रिया पूरी की गई थी। इसके बाद वर्ष 2018-19 में निर्माण कार्य शुरू हुआ।
शुरुआत में पूरी योजना की लागत 25.84 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी। इसके तहत कुल 400 वन बीएचके फ्लैट बनाए जाने थे। लेकिन निर्माण शुरू होने के वर्षों बाद भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी है।
योजना की मौजूदा भौतिक प्रगति 46 प्रतिशत और वित्तीय प्रगति 34.72 प्रतिशत बताई गई है। वित्तीय प्रगति के आधार पर अब तक संवेदक को 9.09 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
336 फ्लैट का स्ट्रक्चर तैयार, कई काम अब भी बाकी
योजना के 400 फ्लैट में से 64 फ्लैट का निर्माण अभी फाउंडेशन यानी प्लिंथ लेवल पर ही अटका हुआ है। वहीं 336 फ्लैट का स्ट्रक्चर तैयार हो चुका है।
हालांकि स्ट्रक्चर तैयार होने के बावजूद इन फ्लैटों में कई जरूरी काम बाकी हैं। इनमें प्लास्टर, पेंट, दरवाजा-खिड़की, वायरिंग, पानी का कनेक्शन, शौचालय, किचन, सीढ़ियों की रेलिंग और फर्श का काम शामिल है।
इस वजह से तैयार ढांचे को भी लाभुकों को आवंटित कर उन्हें घर उपलब्ध कराना संभव नहीं हो सका है।
लाभुकों को जमा करना था 3.96 लाख रुपये
योजना के तहत प्रत्येक फ्लैट की निर्धारित वास्तविक लागत 6.46 लाख रुपये थी। इसमें लाभुक का अंशदान 3.96 लाख रुपये रखा गया था। बाकी 2.50 लाख रुपये केंद्र और राज्य सरकार के अनुदान से मिलने थे।
इसमें केंद्र सरकार की ओर से 1.50 लाख और राज्य सरकार की ओर से एक लाख रुपये का अनुदान निर्धारित था। चयन के समय लाभुकों को पांच हजार रुपये देकर रजिस्ट्रेशन कराना था। यह राशि उनके कुल अंशदान में शामिल की गई।
इसके बाद लॉटरी के माध्यम से लाभुकों का चयन किया गया। रजिस्ट्रेशन और लाभुकों के चयन की प्रक्रिया नगर परिषद गढ़वा की देखरेख में हुई थी।
निर्माण के हिसाब से किस्त जमा करने की थी व्यवस्था
चयन के बाद लाभुकों को 30 दिनों के भीतर पहली किस्त के रूप में 20 हजार रुपये जमा करने थे। भवन का 25 प्रतिशत निर्माण पूरा होने पर 92,750 रुपये जमा करने थे। इसके बाद निर्माण की प्रगति के अनुसार अंशदान की शेष राशि जमा करने की व्यवस्था थी।
कई लाभुकों के पास अंशदान की पूरी राशि नहीं थी। ऐसे लाभुकों ने बैंक से ऋण लेकर नगर परिषद में राशि जमा की। करीब 114 लाभुक अपना अंशदान जमा कर चुके हैं, जबकि अन्य लाभुकों ने रजिस्ट्रेशन के बाद अंशदान जमा नहीं किया है।
अंशदान से जुड़ी इस स्थिति ने भी योजना के निर्माण को प्रभावित किया है।
पुराने प्राक्कलन ने बढ़ाई परेशानी
योजना को शुरू हुए कई वर्ष बीत जाने के कारण निर्माण सामग्री और वर्तमान निर्माण लागत में काफी अंतर आ चुका है। पुराने प्राक्कलन और मौजूदा लागत के बीच अंतर के कारण परियोजना को आगे बढ़ाने में परेशानी आ रही है।
बताया गया है कि जब तक जुडको की ओर से योजना के प्राक्कलन को संशोधित नहीं किया जाता, तब तक निर्माण कार्य को आगे बढ़ाना संभव नहीं है। इसी वजह से परियोजना की रफ्तार धीमी बनी हुई है।
नौ साल से अपने घर का इंतजार कर रहे लाभुकों को अब योजना के पूरा होने और फ्लैट मिलने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल उन्हें इसके लिए और इंतजार करना पड़ रहा है।

