धनबाद। जिला परिषद की निष्क्रिय और लंबे समय से उपयोग से बाहर पड़ी परिसंपत्तियों को दोबारा जनोपयोगी बनाने की दिशा में पहल शुरू की गई है। इसी क्रम में पंचायती राज विभाग निधि के अंतर्गत धनबाद स्थित निरीक्षण भवन के जीर्णोद्धार कार्य का शिलान्यास जिला परिषद अध्यक्ष श्रीमती शारदा सिंह ने किया।
इस पहल का उद्देश्य जिला परिषद की परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना और आम लोगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का विस्तार करना है।
निरीक्षण भवन के जीर्णोद्धार कार्य की शुरुआत
पंचायती राज विभाग निधि से प्रस्तावित निरीक्षण भवन के जीर्णोद्धार कार्य का शुभारंभ जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह के कर-कमलों द्वारा किया गया।
जीर्णोद्धार के माध्यम से भवन को बेहतर स्थिति में लाने, उसके रख-रखाव में सुधार करने और आवश्यक सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे भवन का उपयोग अधिक प्रभावी तरीके से किए जाने की उम्मीद है।
निष्क्रिय परिसंपत्तियों को दोबारा उपयोग में लाने पर जोर
इस अवसर पर जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह ने कहा कि जिला परिषद की जो भी परिसंपत्तियां लंबे समय से निष्क्रिय हैं या उपयोग से बाहर पड़ी हैं, उन्हें दोबारा उपयोग में लाना प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिसंपत्तियों का जीर्णोद्धार, उचित रख-रखाव और सौंदर्यीकरण कर उन्हें जनोपयोगी एवं आकर्षक बनाया जाएगा। इससे अधिक से अधिक लोग इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।
जनसुविधाओं के विस्तार के साथ आय बढ़ाने की योजना
शारदा सिंह ने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए जिला परिषद की परिसंपत्तियों को मजबूत करना जरूरी है। इससे एक ओर जनसुविधाओं का विस्तार होगा, वहीं दूसरी ओर जिला परिषद की आय के नए स्रोत भी विकसित किए जा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि परिसंपत्तियों का व्यवस्थित उपयोग होने से उनका रख-रखाव बेहतर होगा और लंबे समय तक लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
परिसंपत्तियों से प्राप्त राजस्व का विकास कार्यों में होगा उपयोग
जिला परिषद अध्यक्ष के अनुसार, इन परिसंपत्तियों से भविष्य में प्राप्त होने वाले राजस्व का उपयोग क्षेत्र के विकास और जनहित से जुड़े कार्यों में किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिला परिषद की संपत्तियों को केवल निष्क्रिय संसाधन के रूप में नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उनका उपयोग विकास, जनसुविधा और संस्थागत आय को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।
जिला परिषद की इस पहल से पुरानी परिसंपत्तियों के पुनर्जीवन और स्थानीय स्तर पर सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है।

