धनबाद के 18 वार्डों में पानी की समस्या की समीक्षा, लीकेज और तकनीकी खामियां होंगी दूर

धनबाद के 18 वार्डों में पानी की समस्या की समीक्षा, लीकेज और तकनीकी खामियां होंगी दूर

धनबाद: शहर में नियमित, पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोमवार, 2 नवंबर 2026 को नगर आयुक्त की अध्यक्षता में जलापूर्ति व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न वार्डों में पानी की आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं, पाइपलाइन लीकेज, वितरण नेटवर्क की कमियों, जलापूर्ति टंकियों के रखरखाव और पेयजल की गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। नगर आयुक्त ने संबंधित समस्याओं के स्थायी समाधान और नागरिकों तक नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

18 वार्डों में जलापूर्ति की समस्याओं की समीक्षा

बैठक में वार्ड संख्या 1, 3, 6, 7, 8, 15, 16, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 29, 32, 33, 50 और 53 में पेयजलापूर्ति की स्थिति की समीक्षा की गई। रेलवे फाटक केवट मोहल्ला, सलानपुर बस्ती, पुराना श्याम बाजार, तेतुलमारी, सिजुआ, बांसजोड़ा, बासुदेवपुर, मंडल बस्ती, कुसुम विहार, विकास नगर, विनोद नगर, महावीर नगर, संजय नगर, प्रेम नगर, डिगवाडीह और मनोहरटांड़ सहित कई इलाकों में सामने आई समस्याओं पर चर्चा हुई।

विशेष रूप से वार्ड 15 और 16 में जेएनएनयूआरएम योजना के तहत निर्मित जलापूर्ति टंकियों से नियमित पानी नहीं मिलने का मामला उठाया गया। नगर आयुक्त ने निर्देश दिया कि समस्याओं के वास्तविक कारणों की पहचान कर उनका स्थायी समाधान किया जाए।

कई स्थानों पर पाइपलाइन लीकेज की समस्या

समीक्षा बैठक में भगत सिंह चौक, लोयाबाद शिव मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, झारखंड मोड़, एफसीआई गोदाम, बैंक मोड़, बरमसिया और धनसार चौक सहित विभिन्न स्थानों पर चिह्नित पाइपलाइन लीकेज की स्थिति पर भी विचार किया गया। अधिकारियों ने माना कि पाइपलाइन में रिसाव होने से पानी की बर्बादी के साथ-साथ वितरण का दबाव भी प्रभावित होता है। ऐसे में लीकेज की मरम्मत को प्राथमिकता देने और लंबित समस्याओं का जल्द निराकरण करने की जरूरत बताई गई।

जलापूर्ति टंकियों और वितरण नेटवर्क को मजबूत करने पर चर्चा

बैठक में भैलाटांड़ ईएसआर, राजा तालाब ईएसआर और मनझलाडीह नवाडीह ईएसआर के वितरण नेटवर्क को पुराने नजदीकी नेटवर्क से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। कुछ क्षेत्रों में जलापूर्ति टंकियां चालू होने के बावजूद वितरण पाइपलाइन नहीं होने के कारण सभी मोहल्लों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इस समस्या को दूर करने के लिए आवश्यक वितरण लाइन बिछाने पर विचार किया गया।

वार्ड 29 और 26 में बढ़ती आबादी तथा नए भवनों के निर्माण को देखते हुए जलापूर्ति नेटवर्क के विस्तार और अतिरिक्त जलापूर्ति टंकियों की जरूरत पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा टंकियों में वाटर लेवल मीटर की अनुपलब्धता या खराबी तथा ओवरफ्लो पाइपलाइन को वितरण नेटवर्क से नहीं जोड़े जाने जैसी तकनीकी समस्याओं को दूर करने पर जोर दिया गया।

पेयजल की गुणवत्ता और टंकियों की सफाई पर विशेष ध्यान

बैठक में नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी गई। इसके लिए जल स्रोतों, ईएसआर और वितरण नेटवर्क से नियमित अंतराल पर पानी के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता जांच कराने पर चर्चा हुई। जांच के नतीजों का रिकॉर्ड रखने और पानी की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करने की आवश्यकता बताई गई।

इसके साथ ही जलापूर्ति टंकियों की नियमित सफाई, जरूरत के अनुसार कीटाणुशोधन और सुरक्षा व्यवस्था की जांच सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, पेयजल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए टंकियों का उचित रखरखाव जरूरी है।

DWSD के साथ समन्वय से दूर होंगी समस्याएं

बैठक में स्पष्ट किया गया कि जलापूर्ति योजनाओं का संचालन और रखरखाव पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल-1 तथा प्रमंडल-2 यानी DWSD-1 और DWSD-2 के जिम्मे है। इसलिए नियमित जलापूर्ति, लीकेज की मरम्मत, वितरण नेटवर्क की कार्यशीलता, पानी की गुणवत्ता जांच और टंकियों की सफाई से जुड़े मामलों में दोनों प्रमंडलों के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई करने पर चर्चा हुई।

इसके अलावा चालू और प्रस्तावित जलापूर्ति परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। पाइपलाइन विस्तार, सड़क कटिंग, विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) और लंबित अनुमतियों के कारण होने वाली देरी पर भी विचार-विमर्श हुआ। नगर आयुक्त ने परियोजनाओं के काम में अनावश्यक विलंब रोकने और कार्य पूरा होने के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों व सार्वजनिक संरचनाओं की उचित मरम्मत सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई।

नगर आयुक्त ने कहा कि जलापूर्ति परियोजनाओं का उद्देश्य केवल पाइपलाइन बिछाना या टंकियों का निर्माण करना नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक तक नियमित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना है। इसके लिए तकनीकी खामियों को दूर करने, पानी की बर्बादी रोकने, गुणवत्ता की निगरानी और संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

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