धनबाद। राष्ट्रव्यापी स्वर्वेद संदेश यात्रा के दौरान संत प्रवर श्री विज्ञानदेव जी महाराज सोमवार को धनबाद पहुंचे। यह यात्रा विहंगम योग संत समाज के 103वें वार्षिकोत्सव, समर्पण दीप अध्यात्म महोत्सव और आगामी 25 हजार कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ के संदेश को देशभर के लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से निकाली जा रही है।
काश्मीर से कन्याकुमारी तक आयोजित इस संदेश यात्रा के माध्यम से संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज आत्म जागरण से राष्ट्र जागरण का संदेश दे रहे हैं। धनबाद पहुंचने पर विहंगम योग के अनुयायियों ने उनका स्वागत किया और इसके बाद शोभायात्रा के माध्यम से उन्हें टाउन हॉल तक लाया गया।
हमारे विचार ही हमें सुखी और दुखी बनाते हैं: संत प्रवर
धनबाद टाउन हॉल में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए संत प्रवर श्री विज्ञानदेव जी महाराज ने अध्यात्म और आंतरिक शुचिता पर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि मनुष्य के विचार ही उसे सुख और दुःख का अनुभव कराते हैं। व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक सोच और सेवा की भावना का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि योगी वही है, जो केवल अपने लिए नहीं बल्कि सभी के हित का चिंतन करता है और दूसरों के दुःख को कम करने का प्रयास करता है।
संत प्रवर ने कहा कि जीवन की सार्थकता केवल जीवन जीने में नहीं, बल्कि सेवा और जनकल्याण के कार्यों में निहित है।
कठिनाइयों से घबराने के बजाय आत्मबल बढ़ाने का संदेश
संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज ने कहा कि कोई भी व्यक्ति पूरी तरह अयोग्य नहीं होता। प्रत्येक व्यक्ति के भीतर अच्छाइयां और कमजोरियां दोनों मौजूद होती हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कठिनाइयों और दुर्बलताओं से घबराने के बजाय उन्हें दूर करने के लिए आत्मबल विकसित करने का आह्वान किया। उनके अनुसार, अध्यात्म के प्रकाश और साधना से व्यक्ति को जीवन की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा, शक्ति और सामर्थ्य प्राप्त हो सकती है।
उन्होंने कहा कि स्वर्वेद के संदेश और आध्यात्मिक साधना के माध्यम से साधक अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव कर सकता है।
विहंगम योग की क्रियात्मक साधना से कराया परिचय
कार्यक्रम के दौरान संत प्रवर श्री विज्ञानदेव जी महाराज ने श्रद्धालुओं को विहंगम योग की क्रियात्मक योग साधना के बारे में जानकारी दी और साधना का अभ्यास कराया।
उन्होंने कहा कि यह साधना व्यक्ति को स्वयं से जुड़ने और अपने भीतर की दूरी को समाप्त करने का माध्यम है। दिव्यवाणी के दौरान विहंगम योग के प्रणेता अनंत श्री सद्गुरु सदाफलदेव जी महाराज की साधना और स्वर्वेद के आध्यात्मिक संदेशों का भी उल्लेख किया गया।
कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को बताया गया कि स्वर्वेद आध्यात्मिक यात्रा में साधक को जागरूक बनाए रखने का संदेश देता है।
14 और 15 दिसंबर को वाराणसी में होगा 25 हजार कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ
धनबाद जिला संत समाज के प्रधान संयोजक पप्पू सिंह ने बताया कि विहंगम योग संत समाज के 103वें वार्षिकोत्सव और समर्पण दीप अध्यात्म महोत्सव के अवसर पर 14 और 15 दिसंबर 2026 को वाराणसी स्थित स्वर्वेद महामंदिर परिसर में 25 हजार कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज के मार्गदर्शन में इस संकल्प यात्रा की शुरुआत 18 जुलाई को कन्याकुमारी से हुई थी। यात्रा का उद्देश्य देश के अधिक से अधिक लोगों तक आध्यात्मिक जागरण का संदेश पहुंचाना है।
इससे पहले बोकारो से धनबाद पहुंचने पर सिटी सेंटर के समीप संत प्रवर का स्वागत किया गया। इसके बाद शोभायात्रा टाउन हॉल पहुंची, जहां ध्वजारोहण, सद्गुरुओं के चित्रों पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम में रत्नेश कुमार सिंह (पप्पू सिंह), रविंद्र कुमार अंबष्ट, जीपी सिंह, रामचंद्र तिवारी, विनोद कुमार सिंह, आरडी शर्मा, एपी शेखर, बीपी सिंह सहित बड़ी संख्या में विहंगम योग के अनुयायी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
