स्टीलगेट दुर्गा पूजा पंडाल में दिखेगी आदिवासी संस्कृति की झलक
धनबाद। इस वर्ष स्टीलगेट दुर्गा पूजा पंडाल में श्रद्धालुओं को एक अनूठा अनुभव मिलने वाला है। पूजा समिति ने इस बार पारंपरिक सजावट से अलग विशेष थीम तैयार की है। पंडाल के भीतर अंडमान-निकोबार की जनजातीय और आदिवासी संस्कृति को दर्शाया जाएगा। इसमें वहां के लोगों के रहन-सहन, जीवनशैली और घरों की सजावट की झलक देखने को मिलेगी।
आयोजन समिति के अनुसार, इस थीम के जरिए दर्शनार्थियों को जनजातीय जीवन और सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।
पालों, सब्जियों और बीजों से तैयार होगी पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमा
इस बार मां दुर्गा की प्रतिमा भी खास होगी। इसे पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से तैयार किया जा रहा है। प्रतिमा निर्माण में पालों, सब्जियों और अलसी जैसे विभिन्न बीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
मेदिनीपुर के कांथी निवासी मूर्तिकार रतन मंडल प्रतिमा को आकार दे रहे हैं। समिति की यह पहल पारंपरिक मूर्तिकला को अलग और पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप देने की कोशिश है।
होकन दास एंड कंपनी तैयार कर रही है पंडाल
स्टीलगेट पूजा पंडाल के निर्माण और सजावट की जिम्मेदारी प्रसिद्ध होकन दास एंड कंपनी को दी गई है। पंडाल को भव्य रूप देने के लिए काम किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु थीम और सजावट को करीब से देख सकें।
अंडमान-निकोबार की आदिवासी संस्कृति पर आधारित सजावट इस आयोजन की प्रमुख विशेषताओं में शामिल रहेगी।
चंद्रनगर की लाइटिंग बढ़ाएगी पंडाल की भव्यता
इस वर्ष पंडाल की रोशनी और सजावट को आकर्षक बनाने के लिए पश्चिम बंगाल के चंद्रनगर से विशेष लाइटिंग मंगाई गई है। चंद्रनगर की प्रकाश सज्जा आयोजन का प्रमुख आकर्षण बनने की उम्मीद है।
पंडाल की थीम, प्रतिमा और रोशनी का संयोजन दर्शनार्थियों को अलग अनुभव देने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।
पूजा समिति ने श्रद्धालुओं से की आने की अपील
पूजा समिति के कार्यकारी अध्यक्ष गोकुल चंद्र मंडल और सचिव तपन कुमार मंडल ने संयुक्त रूप से विश्वास जताया कि इस वर्ष की थीम और भव्य सजावट धनबादवासियों के लिए यादगार साबित होगी।
समिति ने सभी धर्मप्रेमियों और श्रद्धालुओं से बड़ी संख्या में पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन करने और आयोजन का हिस्सा बनने की अपील की है।

