धनबाद सदर अस्पताल में गंभीर मरीज का सफल इलाज
धनबाद: सदर अस्पताल धनबाद में चिकित्सकों ने ब्रेन हेमरेज और स्ट्रोक (लकवा) से पीड़ित एक बुजुर्ग मरीज का सफल इलाज किया है। बिहार के बांका जिले के भतकुंडी निवासी मरीज की हालत अस्पताल पहुंचने के समय बेहद गंभीर थी। करीब 10 दिनों तक सघन चिकित्सा और देखरेख के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
जिला जनसंपर्क कार्यालय की ओर से 18 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह उपचार उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन के मार्गदर्शन में अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सीय सेवाओं के तहत किया गया।
अचेत अवस्था में अस्पताल पहुंचे थे बुजुर्ग
परिजनों के मुताबिक, बुजुर्ग मरीज अचानक अचेत हो गए थे और उन्हें लकवे जैसी गंभीर समस्या हो गई थी। जब उन्हें सदर अस्पताल लाया गया, तब उनकी स्थिति नाजुक थी। वह बेसुध थे और उन्हें सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। ऐसे में उनकी हालत को देखते हुए वेंटिलेटर की जरूरत पड़ने की आशंका थी।
अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत सेवाएं दे रहे न्यूरोसर्जन डॉ. नवोदय जिंदल ने मरीज की जांच और उपचार की प्रक्रिया शुरू की।
बिना जटिल सर्जरी के दवाइयों से हुआ उपचार
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, चिकित्सकों ने बिना किसी जटिल सर्जरी के उपयुक्त दवाइयों और गहन चिकित्सीय निगरानी के माध्यम से मरीज का इलाज किया। लगभग 10 दिनों की चिकित्सा के बाद मरीज खतरे से बाहर आ गए और अपने पैरों पर चलने-फिरने में सक्षम हो गए।
इस मामले को सरकारी अस्पताल में गंभीर न्यूरो संबंधी बीमारी के उपचार के उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया गया है।
निजी अस्पताल के भारी खर्च से परिवार को राहत
ब्रेन हेमरेज और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में निजी अस्पतालों में काफी खर्च हो सकता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह खर्च उठाना मुश्किल होता है।
जिला जनसंपर्क कार्यालय के अनुसार, इस मरीज का सदर अस्पताल में इलाज नाममात्र के खर्च पर हुआ। परिवार को केवल कुछ जरूरी बाहरी दवाइयों पर मामूली राशि खर्च करनी पड़ी। इससे परिजनों को आर्थिक राहत मिली।
परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन का जताया आभार
मरीज के स्वस्थ होने पर उनकी पत्नी और अन्य परिजनों ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, उपायुक्त, अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों के प्रति आभार जताया। मरीज की पत्नी ने भावुक होकर कहा कि निजी अस्पताल में इलाज कराना उनके परिवार की आर्थिक क्षमता से बाहर था। सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने उनके पति की जान बचाकर उन्हें नया जीवन दिया।
न्यूरो सेवाओं को मजबूत करने पर जोर
न्यूरोसर्जन डॉ. नवोदय जिंदल ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद अस्पताल की टीम मरीजों को बेहतर उपचार देने का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज जैसी गंभीर स्थितियों में समय पर उचित चिकित्सा मिलने से मरीज की जान बचाने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल में न्यूरो संबंधी सेवाओं को भविष्य में और सुदृढ़ करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

