धनबाद। साइबर अपराधियों के खिलाफ धनबाद पुलिस ने अपनी रणनीति को और मजबूत किया है। अब पुलिस की जांच केवल मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस और डिजिटल गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि साइबर ठगी से जुड़े पैसों के पूरे वित्तीय नेटवर्क पर भी नजर रखी जाएगी।
पुलिस का फोकस अब यह पता लगाने पर होगा कि ठगी की रकम किस खाते में पहुंची, वहां से किन-किन खातों में भेजी गई और आखिरकार रकम किस नेटवर्क तक पहुंची। इस रणनीति के तहत साइबर ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते तक पहुंचाने वाले म्यूल बैंक अकाउंट की पहचान और उन पर त्वरित कार्रवाई को लेकर बैंकिंग संस्थानों के साथ समन्वय मजबूत किया जा रहा है।
40 बैंक शाखा प्रबंधकों के साथ हुई पांचवें चरण की बैठक

वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार के निर्देश पर चल रहे विशेष साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान के तहत शनिवार को समाहरणालय स्थित पुलिस सभागार में पांचवें चरण की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में बरवाअड्डा, गोविंदपुर, टुंडी, पूर्वी टुंडी और मनियाडीह क्षेत्र के सरकारी एवं निजी बैंकों के शाखा प्रबंधकों ने भाग लिया। कुल 40 बैंक शाखाओं के प्रबंधक बैठक में शामिल हुए।
बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने की। इस दौरान साइबर डीएसपी प्रदीप कुमार साव, डीएसपी मुख्यालय कुमार विनोद, विभिन्न थाना प्रभारी और पुलिस अंचल निरीक्षक भी मौजूद रहे।
म्यूल अकाउंट और संदिग्ध लेनदेन की पहचान पर विशेष चर्चा
बैठक में उन बैंक खातों की पहचान को लेकर विस्तार से चर्चा की गई, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे कम समय में दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता है।
पुलिस और बैंक अधिकारियों ने म्यूल अकाउंट, अचानक होने वाले बड़े वित्तीय लेनदेन, नए खातों में असामान्य ट्रांजैक्शन और कम समय में कई खातों में रकम हस्तांतरित करने जैसे पैटर्न पर चर्चा की।
पुलिस का मानना है कि साइबर अपराध की जांच में पैसों की आवाजाही एक महत्वपूर्ण सुराग साबित हो सकती है। इससे अपराधियों के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
समय पर सूचना मिलने से रोका जा सकता है ठगी का पैसा
ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने कहा कि साइबर अपराध के मामलों में समय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ठगी की रकम अक्सर बहुत तेजी से कई बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है।
उन्होंने कहा कि बैंक की ओर से संदिग्ध गतिविधियों की समय पर सूचना मिलने से रकम के आगे के प्रवाह को रोकने और अपराधियों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।
बैठक में नए बैंक खातों के फिजिकल वेरिफिकेशन, मोबाइल नंबर के सही सत्यापन और असामान्य तरीके से खोले जा रहे खातों की निगरानी पर भी विशेष जोर दिया गया।
संदिग्ध तरीके से खुलने वाले खातों पर भी रहेगी नजर
पुलिस ने बैंक अधिकारियों से कहा कि यदि किसी इलाके में अचानक बड़ी संख्या में बैंक खाते खोले जा रहे हों या कोई व्यक्ति लगातार अन्य लोगों के नाम पर खाते खुलवाने में सक्रिय दिखाई दे, तो ऐसी गतिविधियों की जानकारी पुलिस के साथ साझा की जाए।
बैठक में ऑनलाइन गेमिंग, गैम्बलिंग, सट्टेबाजी और अन्य संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े असामान्य वित्तीय लेनदेन पर भी नजर रखने की आवश्यकता बताई गई।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। डिजिटल नेटवर्क तक पहुंचने में पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण है, वहीं अपराधियों के वित्तीय नेटवर्क को पहचानने और रोकने में बैंकिंग संस्थानों की भी अहम जिम्मेदारी है।
धनबाद पुलिस की इस रणनीति का उद्देश्य साइबर ठगी करने वाले अपराधियों की पहचान के साथ-साथ उनके पैसों के पूरे नेटवर्क को समझना और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों पर समय रहते कार्रवाई करना है।

