Dhanbad News: धनबाद में स्वच्छ हवा के लिए नई पहल, बंद खदानों के पुनरुद्धार और रोजगार पर जोर

Dhanbad News: धनबाद में स्वच्छ हवा के लिए नई पहल, बंद खदानों के पुनरुद्धार और रोजगार पर जोर

धनबाद में क्लीन एयर संवाद 2026 का आयोजन

धनबाद: कोयला खनन से प्रभावित क्षेत्रों में वायु प्रदूषण कम करने, जनस्वास्थ्य की सुरक्षा और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के मुद्दे पर शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को आईआईटी (आईएसएम) धनबाद परिसर में ‘क्लीन एयर संवाद 2026’ का आयोजन किया गया। ‘स्वच्छ हवा, स्वस्थ समुदाय और टिकाऊ खनन’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में जिला प्रशासन, शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों, खनन क्षेत्र, नागरिक समाज संगठनों और स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का आयोजन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-आईएसएम) धनबाद और असर सोशल इंपैक्ट एडवाइजर्स के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। संवाद में खनन प्रभावित क्षेत्रों में वायु प्रदूषण, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों, पर्यावरण संरक्षण और वैकल्पिक आजीविका के अवसरों पर चर्चा हुई।

‘टुवर्ड्स सस्टेनेबल माइनिंग एंड हेल्थियर लाइव्स इन धनबाद’ रिपोर्ट जारी

कार्यक्रम के दौरान ‘Towards Sustainable Mining and Healthier Lives in Dhanbad’ रिपोर्ट का विमोचन किया गया। रिपोर्ट में खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के अनुभवों, वायु प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं, स्वास्थ्य पर संभावित प्रभावों और स्थानीय विकास की प्राथमिकताओं को सामने रखा गया है।

इस रिपोर्ट के माध्यम से खनन प्रभावित समुदायों की समस्याओं और उनकी जरूरतों पर ध्यान केंद्रित किया गया। संवाद में पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए शोध, प्रशासन और स्थानीय समुदायों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

बंद खदानों के पुनरुद्धार से खुल सकते हैं नए अवसर

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि धनबाद के उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन ने कहा कि सक्रिय कोयला खदानों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों की निकटता के कारण धनबाद में वायु प्रदूषण की चुनौती गंभीर और विशिष्ट है।

उन्होंने यूरोप के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बंद खदानों के वैज्ञानिक पुनरुद्धार और उनके वैकल्पिक उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। उपायुक्त के अनुसार, ऐसे प्रयास पर्यावरण सुधार के साथ आर्थिक अवसर पैदा करने में भी मददगार हो सकते हैं।

उन्होंने बंद भूमिगत खदानों के पानी से भू-तापीय ऊर्जा उत्पादन और गहरी खुली खदानों को कृत्रिम झीलों या अन्य उपयोगी स्थलों में बदलने जैसे विकल्पों का अध्ययन करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मॉडलों को अपनाते समय स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

धूल नियंत्रण और व्यावहारिक शोध पर जोर

उपायुक्त ने शोधकर्ताओं और तकनीकी संस्थानों से ऐसे शोध पर ध्यान देने की अपील की, जिनके निष्कर्षों को जमीन पर लागू किया जा सके। उन्होंने ओवरबर्डन (OB) डंप से उड़ने वाली धूल और काली राख पर नियंत्रण के उपायों पर विचार करने की जरूरत बताई।

इसके साथ ही प्लास्टिक कचरे का उपयोग कर सड़क निर्माण जैसे विकल्पों पर भी अध्ययन करने का सुझाव दिया। उन्होंने पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए तकनीकी संस्थानों और संबंधित विभागों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण बताया।

खनन प्रभावित लोगों के लिए गैर-कोयला रोजगार जरूरी

आदित्य रंजन ने कहा कि पर्यावरण सुधार की योजनाओं में स्थानीय समुदायों की भागीदारी जरूरी है। लोगों को सड़क और नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ स्वच्छ हवा, धूल नियंत्रण और जनस्वास्थ्य से संबंधित मुद्दों पर भी अपनी मांग रखने के लिए जागरूक करना होगा।

उन्होंने जमीन धंसने, वायु एवं जल प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों का उल्लेख करते हुए अगली पीढ़ी के लिए कोयले से इतर रोजगार के अवसर विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और शहरी सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ धनबाद में पैदल चलने और साइकिल चलाने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित करने की आवश्यकता भी बताई।

तकनीकी सत्र में पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर चर्चा

कार्यक्रम में ‘खनन प्रभावित क्षेत्रों में सहभागी दृष्टिकोण को मजबूत करना’ विषय पर तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। इसका संचालन शशिधर झा ने किया।

सत्र में पर्यावरण समिति के प्रतिनिधि भोलनाथ राम, हृदय रोग विशेषज्ञ एवं पूर्व उप अधीक्षक डॉ. सुनील सिन्हा और ज्ञान विज्ञान समिति के रवि सिंह ने पर्यावरणीय अनुपालन, धूल नियंत्रण तथा जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में स्वच्छ हवा और स्वस्थ जीवन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रशासन, शोध संस्थानों, खनन क्षेत्र और स्थानीय समुदायों के बीच सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया गया।

स्रोत: जिला जनसंपर्क कार्यालय, धनबाद।

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