बारामूड़ी खटाल में 20 एकड़ सरकारी जमीन की नापी
धनबाद। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की पहचान और सीमांकन के लिए जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। उपायुक्त के आदेश पर गुरुवार को लगातार दूसरे दिन धनबाद अंचल अधिकारी की मौजूदगी में जमीन की नापी की गई। अभियान की शुरुआत बारामूड़ी खटाल से हुई है, जहां प्रशासन के अनुसार करीब 20 एकड़ सरकारी जमीन है।
नापी के दौरान कई घरों और वेडिंग वेल्स के कुछ हिस्से सरकारी जमीन के दायरे में आने की बात सामने आई है। प्रशासन अब संबंधित लोगों को नोटिस देने की तैयारी कर रहा है। इस कार्रवाई से इलाके में रहने वाले करीब 180 परिवारों के बीच चिंता बढ़ गई है।
पम्पू तालाब और लोको टैंक की जमीन का भी होगा सीमांकन
प्रशासन के अनुसार, बारामूड़ी खटाल के बाद पम्पू तालाब और लोको टैंक की जमीन की भी नापी कर सीमांकन किया जाएगा। धनबाद के अंचल अधिकारी राम प्रवेश ने बताया कि फिलहाल सरकारी जमीन की पहचान करने के उद्देश्य से नापी कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि पहले बारामूड़ी खटाल की जमीन चिह्नित करने का निर्देश मिला है। नापी के दौरान जिन घरों और वेडिंग वेल्स के हिस्सों के सरकारी जमीन में आने की बात सामने आई है, उनसे संबंधित लोगों को नोटिस देने की तैयारी की जा रही है।
अंचल अधिकारी के अनुसार, उपायुक्त के आदेश के तहत आगे की कार्रवाई होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जमीन की नापी से 180 परिवारों में बढ़ी चिंता
बारामूड़ी खटाल में जमीन की नापी शुरू होने के बाद वहां रहने वाले परिवारों को दोबारा विस्थापन की आशंका सता रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के मौके पर पहुंचे थे। पूछने पर अधिकारियों ने इसे जमीन का सर्वे बताया।
लंबे समय से इलाके में रह रहे परिवारों को डर है कि जमीन चिह्नित होने के बाद उन्हें अपने घरों से हटना पड़ सकता है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी संबंधित लोगों को नोटिस देने की तैयारी की बात कही गई है।
वर्ष 2005 में बसाए जाने का स्थानीय निवासी का दावा
स्थानीय निवासी आदित्य यादव के अनुसार, वर्ष 2005 में बेकारबांध तालाब के पीछे से लाकर दर्जनों परिवारों को बारामूड़ी खटाल क्षेत्र में बसाया गया था। उनका कहना है कि तब से कई परिवार यहां रह रहे हैं और उनकी जिंदगी इसी इलाके से जुड़ गई है।
आदित्य यादव के मुताबिक, लंबे समय से रहने के बाद दोबारा विस्थापन की आशंका ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय परिवारों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत से अपने घर बनाए हैं और उनके बच्चों की पढ़ाई तथा परिवार की आजीविका भी इसी जगह से जुड़ी है।
उपायुक्त से मिलकर पुनर्वास का मुद्दा उठाएंगे लोग
बारामूड़ी खटाल के निवासियों का कहना है कि यदि उन्हें वहां से हटना पड़ा, तो रहने की व्यवस्था, बच्चों की शिक्षा और रोजगार पर असर पड़ सकता है। वे चाहते हैं कि सरकारी जमीन से संबंधित कार्रवाई के दौरान उनकी परिस्थितियों और पुनर्वास की जरूरतों पर भी विचार किया जाए।
स्थानीय लोगों ने बताया कि वे अपनी समस्याएं लेकर उपायुक्त से मिलेंगे। उनका कहना है कि प्रशासन के सामने अपना पक्ष रखने और पुनर्वास के मुद्दे पर चर्चा करने के बाद ही वे आगे की रणनीति तय करेंगे।

