सरायकेला। लगातार दो दिनों से हो रही बारिश और सुवर्णरेखा परियोजना से पानी छोड़े जाने के बाद चांडिल डैम का जलस्तर शुक्रवार शाम 4 बजे 181 RL मीटर को पार कर गया। जलस्तर बढ़ने के बाद डूब क्षेत्र में आने वाले चार प्रखंडों के 30 से अधिक गांवों के निचले इलाकों और खेतों में पानी भर गया है।
स्थानीय जानकारी के अनुसार कई खेतों में कमर तक पानी पहुंच गया है। इससे हजारों एकड़ में लगी धान की फसल के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। खासकर ऐसी फसल जो दूध भरने और पकने की अवस्था में पहुंच चुकी थी, उसके लंबे समय तक पानी में डूबे रहने से नुकसान की चिंता बढ़ गई है।
चार प्रखंडों के 30 से अधिक गांवों में खेत जलमग्न
चांडिल डैम का जलस्तर बढ़ने से कुकड़ू, नीमडीह, चांडिल और ईचागढ़ प्रखंडों के कई गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं।
कुकड़ू प्रखंड के बांदाबीर, केंदाआन्दा, आदारडीह, चौका, कारकीडीह और चानो-चोराटखाल के अलावा नीमडीह प्रखंड के हुटू, आंडा, तिलाईटांड़, कल्याणपुर, लावा और सीमा में निचले खेतों में पानी भरने की जानकारी है।
इसी तरह चांडिल प्रखंड के रसुनिया, हाथीनादा, रूयानी, पियालडीह, बोराबिंदा, केशरगड़िया और डिमुडीह तथा ईचागढ़ प्रखंड के दियाडीह, रुगड़ी, खोकरो, मैसाढ़ा, गाराडीह, मातकमडीह, लोपसोडीह, छोटा आमड़ा, हुटुप, ईचागढ़, पातकुम और हुरलूंग समेत कई गांवों के खेत प्रभावित बताए गए हैं।
धान की फसल पर बढ़ा संकट
प्रभावित किसानों के अनुसार, खेतों में लगी धान की फसल इस समय महत्वपूर्ण अवस्था में है। किसानों का कहना है कि यदि अगले 24 से 48 घंटे में खेतों से पानी नहीं निकला तो लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
फसल प्रभावित होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति पैदा होने की आशंका है। डैम के डूब क्षेत्र में बड़ी संख्या में विस्थापित परिवारों की कृषि भूमि भी शामिल है।
विस्थापित अधिकार मंच ने परियोजना प्रबंधन पर उठाए सवाल
विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने प्रभावित किसानों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि चांडिल परियोजना के लिए विस्थापित परिवारों ने अपनी जमीन और घर गंवाए, लेकिन अब उसी परियोजना के कारण उनकी फसल प्रभावित हो रही है।
राकेश महतो का आरोप है कि खेतों में पानी भरने की शिकायत को लेकर किसान संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कई बार अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि जलस्तर बढ़ने से पहले किसानों को पर्याप्त सूचना मिलनी चाहिए, ताकि वे संभावित नुकसान को कम करने के लिए तैयारी कर सकें।
किसानों ने फसल नुकसान के सर्वे और मुआवजे की मांग की
प्रभावित किसानों में जलस्तर बढ़ने और खेतों में पानी भरने को लेकर नाराजगी है। किसानों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान खेतों के डूबने की समस्या सामने आती है। उनका आरोप है कि समय पर सूचना और फसल नुकसान का सर्वे नहीं होने से परेशानी बढ़ जाती है।
विस्थापित अधिकार मंच ने प्रशासन और परियोजना प्रबंधन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें जलस्तर का तत्काल प्रबंधन कर खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था, प्रभावित खेतों का सर्वे कर फसल क्षति का मुआवजा और भविष्य में जलस्तर बढ़ाने से पहले किसानों को अनिवार्य सूचना देने की व्यवस्था शामिल है।
समय रहते हस्तक्षेप की मांग
राकेश रंजन महतो ने कहा कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया और धान की फसल बर्बाद होती है तो सरकार और परियोजना प्रबंधन को किसानों के नुकसान का जवाब देना होगा।
फिलहाल चांडिल डैम का जलस्तर 181 RL मीटर पार होने के बाद डूब क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ गई है। प्रभावित ग्रामीणों की नजर अब जलस्तर के आगे के रुझान और प्रशासन की ओर से होने वाली कार्रवाई पर है।

