बहुचर्चित CGPSC घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तत्कालीन विशेष ड्यूटी अधिकारी (OSD) चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल वह छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज में एडिशनल कलेक्टर के पद पर तैनात हैं।
2020-21 की परीक्षा में पेपर लीक का आरोप
चेतन बोरघरिया की गिरफ्तारी के बाद मामले में कई अहम बातें सामने आई हैं। ED के मुताबिक, बोरघरिया को 7 दिन की कस्टोडियल रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।
जांच एजेंसी का दावा है कि CGPSC की वर्ष 2020 और 2021 की परीक्षाओं में कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक हुआ था। उम्मीदवारों से अवैध तरीके से पैसे लेने और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की जांच में बोरघरिया की भूमिका भी सामने आई है।
उनकी गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है।
तत्कालीन चेयरमैन के खिलाफ भी केस
इस मामले में ED ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW)/ACB रायपुर की ओर से दर्ज FIR के आधार पर जांच शुरू की थी। यह FIR CGPSC राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों को लेकर दर्ज की गई थी।
इसके बाद CBI ने भी मामले की जांच शुरू की। केंद्रीय जांच एजेंसी ने CGPSC के तत्कालीन चेयरमैन तमन सिंह सोनवानी समेत अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। बाद में मामले में आरोपपत्र भी दाखिल किया गया।
चेतन बोरघरिया के ठिकानों पर छापेमारी
ED की टीम सितंबर की शुरुआत में चेतन बोरघरिया से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। तलाशी के दौरान जांच एजेंसी ने मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस जब्त किए थे।
जांच में एक कंपनी के वित्तीय लेन-देन में शामिल होने की बात सामने आई है। ED को आशंका है कि इस कंपनी का इस्तेमाल फंड की लेयरिंग के लिए किया गया हो सकता है।
परीक्षा की पारदर्शिता पर भी सवाल
इस मामले में वर्ष 2022 के बाद हुई कुछ भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठे थे। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया और रसूखदार परिवारों से जुड़े उम्मीदवारों को ऊंचे पदों पर चयनित किया गया।
इन्हीं आरोपों और कथित अनियमितताओं को लेकर जांच आगे बढ़ रही है।

