नई दिल्ली: BRICS समिट के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेक्नोलॉजी और जरूरी खनिजों को लेकर बड़ी बात कही। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इनका इस्तेमाल दबाव बनाने या हथियार के तौर पर किया गया, तो इससे दुनिया की साझा तरक्की प्रभावित हो सकती है।
अपने समापन भाषण में पीएम मोदी ने BRICS देशों से वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग और मजबूत करने की अपील की।
विकास के साथ पर्यावरण की सुरक्षा भी जरूरी
पीएम मोदी ने कहा कि मानव विकास और पर्यावरण की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान चार प्रमुख बातों पर ध्यान दिया गया—लचीलापन, इनोवेशन, सहयोग और टिकाऊ विकास।
उन्होंने कहा कि भारत ने सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर BRICS के साझा लक्ष्यों को ऐसे सहयोग में बदलने की कोशिश की, जिससे सभी देशों को फायदा हो।
टेक्नोलॉजी और जरूरी खनिजों का हथियार की तरह इस्तेमाल न हो
प्रधानमंत्री ने कहा कि रणनीतिक संसाधनों और नई तकनीक का इस्तेमाल किसी देश पर दबाव बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा होने पर दुनिया की साझा प्रगति रुक सकती है।
मोदी ने कहा कि BRICS में टेक्नोलॉजी का फायदा सभी देशों और समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि BRICS का सहयोग केवल सरकारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसमें उद्यमियों, किसानों, वैज्ञानिकों, महिलाओं, युवाओं और आम लोगों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
भारत-चीन संबंधों पर शी जिनपिंग ने क्या कहा?
BRICS समिट के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत और चीन के रिश्तों को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार हैं।
शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे के विकास के लिए खतरा नहीं, बल्कि अवसर हैं।
चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पिछले दो साल में शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो बार मुलाकात हुई है। चीन का कहना है कि इन बैठकों से दोनों देशों के संबंधों को फिर से मजबूत करने में मदद मिली है।

