एक पैर के सहारे स्कूल जाती थी 7 साल की रागिनी, अब सरकार उठाएगी इलाज का खर्च

एक पैर के सहारे स्कूल जाती थी 7 साल की रागिनी, अब सरकार उठाएगी इलाज का खर्च

पढ़ाई की ललक रागिनी को मुख्यमंत्री तक ले गई

बलिया। एक पैर के सहारे कूदते हुए स्कूल जाने वाली सात वर्षीय छात्रा रागिनी की पढ़ाई के प्रति लगन अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गई है। स्कूल जाने में हो रही परेशानी को लेकर डीएम से साइकिल की मांग करने वाली रागिनी के बेहतर इलाज का खर्च अब प्रदेश सरकार उठाएगी।

जिला प्रशासन ने बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उसे विशेष जांच और बेहतर उपचार के लिए वाराणसी स्थित बीएचयू भेजने का निर्णय लिया है। प्रशासन का कहना है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह के आधार पर रागिनी के पैर के उचित उपचार की व्यवस्था की जाएगी।

400 मीटर की दूरी भी लगती थी लंबी राह

विकासखंड मनियर के ग्राम पंचायत रानीपुर निवासी देवेंद्र राजभर की बेटी रागिनी दिघेड़ा गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक की छात्रा है।

रागिनी के घर से स्कूल की दूरी लगभग 400 मीटर है, लेकिन उसके लिए यह छोटी दूरी भी काफी मुश्किल भरी थी। एक पैर के सहारे चलने वाली रागिनी को स्कूल जाते समय कई बार थककर रास्ते में बैठना पड़ता था।

दर्द बढ़ने पर वह रोने लगती थी। इसके बावजूद पढ़ाई के प्रति उसकी रुचि कम नहीं हुई। रागिनी लगातार स्कूल जाना चाहती थी और पढ़ाई जारी रखने की इच्छा रखती थी।

डीएम से मांगी थी साइकिल, मिलीं दो ट्राइसाइकिल

रागिनी ने 31 अगस्त को बलिया के जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह से अपनी परेशानी साझा की थी। उसने बताया था कि उसका एक पैर खराब है और स्कूल जाने के लिए उसे साइकिल की जरूरत है।

रागिनी ने यह भी कहा था कि वह खूब पढ़ना चाहती है। उसकी भावुक अपील इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुई और इसके बाद मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा।

बुधवार को जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह रागिनी के गांव पहुंचे। इस दौरान प्रशासन की ओर से उसे एक नहीं, बल्कि दो ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई गईं। इसके साथ ही जरूरत का अन्य सामान भी दिया गया।

ट्राइसाइकिल मिलने के बाद रागिनी ने खुशी जताते हुए कहा कि अब उसे और कुछ नहीं चाहिए।

मेडिकल जांच के बाद BHU भेजने का फैसला

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद गुरुवार को रागिनी का जिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. करण सिंह चौहान ने सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय की मौजूदगी में बच्ची के पैर की जांच की।

जांच के दौरान चिकित्सकों ने कुछ विशेष परीक्षणों की जरूरत बताई, जिनकी सुविधा जिला स्तर पर उपलब्ध नहीं है। इसके बाद परिवार की सहमति से रागिनी को वाराणसी स्थित बीएचयू अस्पताल भेजने का निर्णय लिया गया।

तय कार्यक्रम के अनुसार रागिनी को शनिवार को अपनी मां बबीता देवी के साथ वाराणसी भेजा जाएगा। वहां विशेषज्ञ चिकित्सक बच्ची के पैर की विस्तृत जांच करेंगे।

प्रदेश सरकार उठाएगी इलाज का पूरा खर्च

जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की राय के आधार पर रागिनी के पैर का उचित उपचार कराया जाए। जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन अथवा अन्य चिकित्सा प्रक्रिया पर विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि रागिनी के इलाज में आने वाला खर्च प्रदेश सरकार की ओर से वहन किया जाएगा।

सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय के अनुसार, बचपन में रागिनी के पैर में फ्रैक्चर हुआ था। इसके बाद पैर की हड्डी घुटने से ठीक तरीके से जुड़ नहीं सकी। समय बीतने के साथ मांसपेशियां कमजोर होती गईं और पैर का पंजा भी झुक गया।

अब बीएचयू के विशेषज्ञ चिकित्सकों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रागिनी के पैर के लिए कौन-सा उपचार सबसे उपयुक्त होगा। फिलहाल प्रशासन की पहल से रागिनी और उसके परिवार को बेहतर इलाज की उम्मीद जगी है।

रिपोर्ट: ANP News

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *