असम बाढ़: 10 हजार परिवारों तक राहत पहुंचाएगा रिलायंस फाउंडेशन, 4 हजार मवेशियों की भी होगी देखभाल

असम बाढ़: 10 हजार परिवारों तक राहत पहुंचाएगा रिलायंस फाउंडेशन, 4 हजार मवेशियों की भी होगी देखभाल

गुवाहाटी: ऊपरी असम में भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए रिलायंस फाउंडेशन ने व्यापक राहत अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत शिवसागर और चराइदेव जिलों के कम से कम 10 हजार परिवारों तक भोजन, सुरक्षित पेयजल, राशन, स्वास्थ्य सेवाएं और अस्थायी आश्रय से जुड़ी सहायता पहुंचाई जाएगी। दोनों जिलों में पांच लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं।

जिला प्रशासन के साथ मिलकर शुरू हुआ राहत अभियान

रिलायंस फाउंडेशन की आपदा प्रबंधन टीम ने जिला प्रशासन और स्थानीय संगठनों के साथ प्रभावित क्षेत्रों का आकलन करने के बाद राहत कार्य शुरू किया है। इस अभियान में वनतारा, रिलायंस रिटेल और जियो भी सहयोग कर रहे हैं।

भोजन, राशन और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था

जिन परिवारों के पास भोजन और राशन की व्यवस्था नहीं है, उनके लिए सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही है। इसके अलावा सूखे राशन के पैकेट भी वितरित किए जाएंगे।

विस्थापित परिवारों के लिए तिरपाल, ग्राउंडशीट, मच्छरदानी, रस्सी और बिस्तर जैसी आवश्यक सामग्रियों से युक्त आपातकालीन आश्रय किट उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि उन्हें सुरक्षित ठहरने की सुविधा मिल सके।

स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली पर भी जोर

बाढ़ के कारण प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं भी बाधित हुई हैं। इन्हें जल्द सामान्य करने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की सफाई और मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है। साथ ही प्रभावित परिवारों को स्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई से संबंधित आवश्यक किट भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

4 हजार मवेशियों के लिए चारा और इलाज की व्यवस्था

बाढ़ से प्रभावित पशुधन की देखभाल के लिए वनतारा की 39 सदस्यीय टीम मौके पर तैनात की गई है। यह टीम पशुओं के इलाज और देखभाल के साथ स्थानीय समुदाय के अन्य जानवरों की भी सहायता करेगी।

रिलायंस फाउंडेशन ने लगभग 4 हजार प्रभावित मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था करने की भी योजना बनाई है, ताकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुधन को राहत मिल सके।

जरूरतमंदों तक समय पर पहुंचेगी सहायता

राहत सामग्री सही और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे, इसके लिए रिलायंस फाउंडेशन की टीमें जिला प्रशासन, सरकारी विभागों, स्थानीय संस्थाओं और सहयोगी संगठनों के साथ समन्वय बनाकर राहत कार्यों को आगे बढ़ा रही हैं।

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