हाईकोर्ट के जमानत आदेश में हस्तक्षेप से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
रांची। गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट द्वारा दिए गए जमानत आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। अमन श्रीवास्तव को मिली जमानत के खिलाफ झारखंड सरकार की ओर से दाखिल विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
मामले की सुनवाई जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मामले में साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब ट्रायल में बहस का चरण चल रहा है।
मामले की वर्तमान स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह झारखंड हाईकोर्ट के जमानत आदेश में हस्तक्षेप करने का इच्छुक नहीं है। इसके साथ ही राज्य सरकार की याचिका खारिज हो गई और अमन श्रीवास्तव को हाईकोर्ट से मिली जमानत बरकरार रही।
झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती
झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट की क्रिमिनल अपील संख्या 96/2026 में 9 मार्च 2026 को दिए गए अंतिम आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी।
हाईकोर्ट ने अमन श्रीवास्तव को जमानत प्रदान की थी, जिसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। सरकार की ओर से हाईकोर्ट के जमानत आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में अमन श्रीवास्तव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे और अधिवक्ता आकृति प्रिया ने पक्ष रखा। वहीं झारखंड सरकार की ओर से अधिवक्ताओं की टीम ने मामले में अपनी दलीलें पेश कीं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब मामले का ट्रायल निचली अदालत में आगे बढ़ेगा।
9 मार्च को झारखंड हाईकोर्ट ने दी थी जमानत
झारखंड हाईकोर्ट की जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने 9 मार्च 2026 को ATS थाना कांड संख्या 10/2023 में अमन श्रीवास्तव को जमानत दी थी।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में अमन श्रीवास्तव के लंबे समय से जेल में रहने और मामले की परिस्थितियों पर विचार किया था। अदालत ने कहा था कि इस मामले में UAPA की धारा 43D(5) के तहत जमानत से संबंधित कड़ी शर्तें राहत देने में बाधा नहीं बनती हैं।
अदालत ने अमन श्रीवास्तव को 10 हजार रुपये के जमानत बांड और समान राशि के दो जमानतदारों के आधार पर रिहा करने का निर्देश दिया था।
हर तारीख पर अदालत में उपस्थित रहने की शर्त
जमानत देते समय हाईकोर्ट ने अमन श्रीवास्तव पर कुछ शर्तें भी लागू की थीं। आदेश के अनुसार, ट्रायल पूरा होने तक उन्हें निचली अदालत में प्रत्येक निर्धारित तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा।
हालांकि, पर्याप्त और उचित कारण होने पर अदालत से व्यक्तिगत उपस्थिति में छूट ली जा सकती है।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि जमानत आदेश के दौरान की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निपटारे तक सीमित हैं। इन टिप्पणियों का ट्रायल कोर्ट द्वारा मामले में अंतिम फैसला सुनाते समय कोई प्रभाव नहीं होगा।
सह आरोपियों से अलग मानी गई थी अमन की स्थिति
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में अमन श्रीवास्तव की परिस्थितियों को मामले के अन्य सह आरोपियों से अलग माना था। मामले में कई अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं पहले खारिज हो चुकी थीं।
हाईकोर्ट ने जांच के दौरान सामने आए बयानों और उपलब्ध सामग्री पर विचार करते हुए कहा था कि अमन श्रीवास्तव के खिलाफ सीधे बातचीत या उनके द्वारा निर्देश दिए जाने से जुड़ी स्पष्ट सामग्री सामने नहीं आई।
कोर्ट ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए जमानत देने का फैसला किया था। हालांकि, मामले में अंतिम निर्णय ट्रायल पूरा होने के बाद ही होगा।
49.83 लाख रुपये नकद बरामदगी से जुड़ा है मामला
यह मामला 20 जुलाई 2023 का है। ATS को सूचना मिली थी कि अमन श्रीवास्तव गिरोह से जुड़े कुछ लोग कथित रूप से कोयला कारोबारियों, ठेकेदारों और अन्य लोगों से वसूली गई रकम लेकर रांची पहुंच रहे हैं।
सूचना के आधार पर छापेमारी दल का गठन किया गया। पुलिस ने एक सफेद स्कॉर्पियो को रोककर तलाशी ली, जिसमें दो लोगों को पकड़ा गया।
तलाशी के दौरान वाहन की पिछली सीट के नीचे रखे एक बैग से 49.83 लाख रुपये नकद बरामद किए जाने की बात सामने आई थी। मामले में ATS ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और UAPA की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
जांच पूरी होने के बाद मामले में चार्जशीट दाखिल की गई और 23 फरवरी 2024 को आरोप तय होने के बाद ट्रायल शुरू हुआ। अब साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मामले में बहस का दौर चल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा झारखंड सरकार की SLP खारिज किए जाने के बाद अमन श्रीवास्तव की जमानत फिलहाल बरकरार है, जबकि मामले का अंतिम फैसला निचली अदालत के ट्रायल के बाद होगा।

