धनबाद: बाबूडीह स्थित बाड़ामुड़ी खटाल में रहने वाले 200 से अधिक परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है। खटाल खाली कराने को लेकर चल रही प्रशासनिक कार्रवाई के बीच अब झारखंड राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी हस्तक्षेप किया है। आयोग ने धनबाद के उपायुक्त को पत्र भेजकर बेदखली की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने का अनुरोध किया है। हालांकि, आयोग की पहल के बावजूद शुक्रवार को अंचल प्रशासन की ओर से परिवारों को नोटिस देने की कार्रवाई जारी रही।
पिछड़ा वर्ग आयोग ने डीसी को भेजा पत्र
झारखंड राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष जानकी प्रसाद यादव के निर्देश पर सदस्य सचिव विनोद कुमार बांक ने 29 अक्टूबर 2026 को धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन को पत्र भेजा। इसमें बाड़ामुड़ी खटाल में रह रहे परिवारों की स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्हें तत्काल हटाने की कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया गया है।
आयोग के अनुसार, ये परिवार वर्ष 2005 से इस इलाके में रह रहे हैं। बताया गया है कि प्रशासन की ओर से बसाए जाने के बाद लोगों ने यहां अपने घर बनाए और आजीविका के साधन विकसित किए। ऐसे में अचानक बेदखली की कार्रवाई होने से परिवारों के सामने आवास के साथ-साथ रोजगार और बच्चों की पढ़ाई का संकट भी पैदा हो सकता है।
दस्तावेजों की जांच और पुनर्वास की मांग
आयोग ने खटाल में रहने वाले परिवारों से जुड़े दस्तावेजों की जांच वरीय कमेटी से कराने की मांग की है। साथ ही कहा है कि जांच में जरूरतमंद और गरीब परिवारों की स्थिति सामने आने पर उनके पुनर्वास की व्यवस्था पर भी विचार किया जाना चाहिए।
इस मामले को आयोग तक पहुंचाने में झामुमो महानगर संगठन सचिव सुधीर कुमार यादव और सुंदर प्रसाद यादव की भूमिका रही। दोनों की ओर से परिवारों की समस्या और बेदखली की आशंका से आयोग को अवगत कराया गया था। इसके बाद आयोग ने उपायुक्त को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप का अनुरोध किया।
डीसी बोले- सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में कार्रवाई जरूरी
दूसरी ओर, धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन ने कहा है कि उन्हें आयोग का पत्र अभी प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह लोगों को उजाड़ने के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि, उनके अनुसार सरकारी जमीन पर अतिक्रमण, सड़क पर अवरोध और पशुओं को सड़क पर छोड़ने जैसी समस्याओं को लेकर कार्रवाई जरूरी है।
डीसी ने कहा कि प्रशासन सरकार के निर्देशों के अनुरूप काम करेगा। ऐसे में एक तरफ आयोग परिवारों के दस्तावेजों की जांच और जरूरत पड़ने पर पुनर्वास की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन सरकारी जमीन और सड़क से जुड़ी समस्याओं पर कार्रवाई की आवश्यकता जता रहा है।
दो दशक से रह रहे परिवारों के भविष्य पर सवाल
बाड़ामुड़ी खटाल में रहने वाले 200 से अधिक परिवारों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल अपने घर और रोजगार को बचाने का है। आयोग ने कार्रवाई रोकने, दस्तावेजों की जांच और जरूरतमंद परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा उठाया है। वहीं, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना होगा कि आयोग के पत्र पर जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या बेदखली की प्रक्रिया से पहले परिवारों के दस्तावेजों की जांच तथा पुनर्वास के विकल्प पर कोई निर्णय लिया जाता है। फिलहाल, बाड़ामुड़ी के परिवारों का भविष्य प्रशासनिक फैसले पर टिका हुआ है।

