डोमगढ़ में भक्ति और अध्यात्म के माहौल में तीसरे दिन का आयोजन
धनबाद, सिंदरी। सिंदरी क्षेत्र के डोमगढ़ में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान महायज्ञ के तीसरे दिन श्रद्धालु भक्ति और अध्यात्म के रंग में सराबोर नजर आए। दिन की शुरुआत तड़के स्नान-ध्यान और मंडप प्रवेश के साथ हुई। इसके बाद आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच देवी-देवताओं का आवाहन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न कराई।
इस अवसर पर मुख्य यजमान गीता देवी और उनके सुपुत्र सपत्नीक शशिकांत सिंह, श्रीकांत सिंह तथा अक्रूरकांत सिंह यजमान वेदी पर बैठे। उन्होंने सर्वकल्याण की भावना से भगवान की पूजा-अर्चना की और आरती उतारी।
पार्थिव शिवलिंग की स्थापना और भव्य अभिषेक
तीसरे दिन के अनुष्ठान का विशेष आकर्षण मिट्टी से निर्मित पार्थिव शिवलिंग की स्थापना और उसका अभिषेक रहा। काशी से आए आचार्यों और वैदिक विद्वानों के सानिध्य में यह धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस दौरान वैदिक ऋचाओं के सस्वर पाठ से पूरा यज्ञ स्थल गूंज उठा।
अभिषेक कराने वाले आचार्यों में पंडित मुकेश पुरोहित, दीपक दुबे, डॉ. महेशा तिवारी, धनंजय पांडेय, अनिल पांडेय और चंदन पांडेय शामिल रहे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पार्थिव शिवलिंग की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है।
गौरांगी गौरी ने सुनाया शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग
पूजन और अभिषेक के बाद दोपहर तथा संध्या सत्र में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हुआ। कथावाचिका गौरांगी गौरी ने अपने मधुर और ओजस्वी वचनों से भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रसंग सुनाया। उनके प्रवचन के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे रहे।
शिव विवाह का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यताओं और शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव की बारात में देवी-देवताओं के साथ भूत-प्रेत, पिशाच गण और अघोरी भी शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि महादेव संपूर्ण सृष्टि के स्वामी हैं और सभी पर कृपा करते हैं।
कथावाचिका ने कहा कि उस समय शिव विवाह में भूत-प्रेत और जीव-जंतु भी बाराती बने थे, जबकि कलियुग में मनुष्य स्वयं भगवान की कथा सुनने और उनके पावन विवाह उत्सव में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त कर रहा है।
कथा श्रवण से मिलता है आध्यात्मिक संदेश
गौरांगी गौरी ने श्रीमद्भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार कथा श्रवण से मनुष्य को अपने संचित पापों से मुक्ति का मार्ग मिलता है। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन को जीव और ब्रह्म के मिलन का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह प्रसंग त्याग, तपस्या और प्रेम का संदेश देता है।
शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनकर पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु भजन और कथा के दौरान भक्तिरस में झूमते नजर आए।
तारा देवी समेत कई लोगों ने किया कथा श्रवण
तीसरे दिन की कथा में भाजपा की तारा देवी, पूर्व विधायक इंद्रजीत महतो की धर्मपत्नी, घनश्याम ग्रोवर, रामदेव पांडेय, मनोज मिश्रा और विजय सिंह सहित कई लोग शामिल हुए। सभी ने कथा श्रवण किया और पूजा-अर्चना में भाग लिया। उनकी उपस्थिति से श्रद्धालुओं में उत्साह देखा गया।
महाआरती के बाद श्रद्धालुओं में महाप्रसाद वितरण
पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के इंतजाम किए गए थे। कथा सत्र के समापन के बाद महाआरती हुई और श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। स्थानीय आयोजकों और ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में धार्मिक चेतना और आपसी सौहार्द को बढ़ावा मिलता है।
NEWS ANP के लिए सिंदरी से राज कुमार शर्मा के साथ प्रेम प्रकाश शर्मा की रिपोर्ट।

