धनबाद। महालया के पावन अवसर पर हीरापुर स्थित हरिमंदिर (काली बाड़ी) में मां की विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। सुबह 4 बजे से शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने भक्ति और श्रद्धा के साथ भाग लिया तथा मां काली का आशीर्वाद लिया। महालया के मौके पर मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल देखने को मिला।
महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र के पाठ से गूंजा मंदिर
महालया के दिन हरिमंदिर में महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का पाठ किया जाता है। इस धार्मिक परंपरा के जरिए देवी दुर्गा की आराधना की जाती है। स्तोत्र पाठ से मंदिर परिसर में भक्ति का वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया।
मां की प्रतिमा को अंतिम रूप देने की परंपरा
महालया के अवसर पर प्रतिमा की आंखों को रंगकर देवी की प्रतिमा को अंतिम रूप देने की परंपरा भी जुड़ी है। इसे देवी के स्वरूप में जीवंतता लाने का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा दुर्गा पूजा की तैयारियों में विशेष महत्व रखती है।
आतिशबाजी के साथ मां के स्वागत की तैयारी
मंदिर के पुजारी भजन दा ने बताया कि महालया के दिन मां के स्वागत के लिए मंदिर परिसर में आतिशबाजी भी की जाती है। महालया को पितृपक्ष की समाप्ति और देवी दुर्गा के आगमन की शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु मां की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
महालया से शुरू होता है दुर्गा पूजा का उत्साह
महालया बंगाल और आसपास के क्षेत्रों में दुर्गा पूजा से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर है। इस दिन देवी दुर्गा के स्वागत की तैयारियों के बीच मंदिरों में विशेष पूजा और स्तोत्र पाठ आयोजित किए जाते हैं। धनबाद के हीरापुर हरिमंदिर में भी यह परंपरा श्रद्धा और भक्ति के साथ निभाई गई।

