धनबाद में 74 किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण
धनबाद। नमामि गंगे योजना के तहत शून्य बजट प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंगलवार को धनबाद में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। जिले के सभी प्रखंडों से आए 74 किसानों ने इसमें भाग लिया।
कार्यशाला में किसानों को प्राकृतिक खेती की प्रणाली, इसके प्रयोग और खेती में इसके महत्व की जानकारी दी गई।
बीजामृत और जीवामृत समेत चार घटकों की जानकारी
कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के प्रधान सह वरीय वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार ने किसानों को शून्य बजट प्राकृतिक खेती के बारे में प्रशिक्षण दिया।
उन्होंने इस खेती प्रणाली के चार प्रमुख घटकों—बीजामृत, जीवामृत, मल्चिंग और वाप्सा की उपयोगिता, प्रयोग की विधि और खेती में इनके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
किसानों को बताया गया कि प्राकृतिक खेती में इन तरीकों का इस्तेमाल किस प्रकार किया जा सकता है।
रासायनिक खाद और महंगे इनपुट के बिना खेती पर जोर
जिला कृषि पदाधिकारी धनबाद अंजना कुमारी ने कहा कि शून्य बजट प्राकृतिक खेती में रासायनिक खाद, कीटनाशक और महंगे बाहरी कृषि इनपुट के बिना फसल उत्पादन पर जोर दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि इस पद्धति में कम पानी की खपत और देशी गाय आधारित कृषि पद्धति को अपनाया जाता है। उनके अनुसार, इससे मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य में सुधार के साथ खेती की लागत तथा कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय और मुनाफा बढ़ने की संभावना भी रहती है।

किसानों ने वैज्ञानिकों से पूछी अपनी समस्याएं
कार्यशाला के दौरान किसानों ने प्राकृतिक खेती से जुड़ी अपनी समस्याएं वैज्ञानिकों के सामने रखीं। डॉ. अनिल कुमार ने किसानों के सवालों का समाधान करते हुए आवश्यक सुझाव दिए।
इस अवसर पर नमामि गंगे के जिला परियोजना पदाधिकारी राजू कुमार, भूमि संरक्षण पदाधिकारी शिव कुमार, जिला उद्यान पदाधिकारी अमितेश कुमार, LDM कार्यालय धनबाद के रोशन आनंद, उप परियोजना निदेशक (आत्मा) मोती लाल रजक, पौधा संरक्षण निरीक्षक मनीष कुमार, KVK के डॉ. आदर्श श्रीवास्तव सहित सभी प्रखंडों के BAO, BTM और ATM मौजूद रहे। कार्यशाला में जिले के 74 किसान भी शामिल हुए।

