इस्लामाबाद/रोम। पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर अपनी सैन्य प्रतिबद्धता दोहराई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने कहा है कि नए रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब की रक्षा के लिए पाकिस्तान अपनी उपलब्ध सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल करने के लिए तैयार है।
पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, रोम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आसिफ से यमन में ईरानी ठिकानों के खिलाफ कथित हवाई हमलों में पाकिस्तानी सेना की भूमिका को लेकर सवाल किया गया था। उन्होंने इस बारे में सीधे तौर पर पुष्टि नहीं की। उन्होंने इतना जरूर कहा कि समझौते के तहत पाकिस्तान की सैन्य क्षमताएं सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए उपलब्ध रहेंगी।
सऊदी पर हूती हमलों के बाद बढ़ी सुरक्षा चिंता
ख्वाजा आसिफ ने यमन के हूती विद्रोहियों की गतिविधियों का जिक्र करते हुए कहा कि सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा बढ़ा है।
पाकिस्तान का कहना है कि यमन के लाल सागर तट पर हूतियों की गतिविधियों और रणनीतिक क्षेत्रों तक उनकी पहुंच से क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। इसका असर लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
इन परिस्थितियों के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ अपने रक्षा सहयोग को लेकर अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट की है।
‘सऊदी का दुश्मन हमारा दुश्मन’
ख्वाजा आसिफ ने सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान के सुरक्षा संबंधों को लेकर स्पष्ट रुख रखा। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान हर उपलब्ध साधन और सैन्य क्षमता का इस्तेमाल करने को तैयार है।
उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि नया रक्षा समझौता केवल राजनीतिक या कूटनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग का दायरा भी बढ़ सकता है।
हालांकि, आसिफ ने यमन में चल रही सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना की प्रत्यक्ष भागीदारी की पुष्टि नहीं की।
क्या है मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट?
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने अगस्त में मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति को सामूहिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती माना जाएगा।
इस समझौते का उद्देश्य तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, सैन्य समन्वय और सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बताया गया है।
समझौते के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर तीनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर समन्वय बढ़ाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।
सैन्य प्रमुखों की बैठक में सुरक्षा और खुफिया सहयोग पर चर्चा
25 सितंबर 2026 को रियाद में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के सैन्य प्रमुखों की बैठक हुई। इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति के साथ-साथ सैन्य समन्वय और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।
बैठक में सऊदी अरब पर हूती हमलों और क्षेत्र में बदलती सुरक्षा परिस्थितियों पर भी विचार किया गया। तीनों देशों के बीच सैन्य क्षमताओं के बेहतर इस्तेमाल और आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
अभी तैयार हो रहा है गठबंधन का संस्थागत ढांचा
रक्षा समझौते के बावजूद तीनों देशों के बीच गठबंधन की पूरी कमांड और संचालन व्यवस्था अभी विकसित की जा रही है।
पाकिस्तान के अनुसार, समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक सचिवालय और संस्थागत ढांचा तैयार किया जा रहा है। फिलहाल गठबंधन में अन्य देशों को तत्काल शामिल करने की कोई योजना नहीं बताई गई है।
इसका मतलब है कि समझौते के राजनीतिक फैसले के बाद अब उसके व्यावहारिक और सैन्य ढांचे को तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।
सऊदी के साथ रक्षा सहयोग, ईरान से बातचीत की वकालत
पाकिस्तान का रुख इस मामले में दो स्तरों पर नजर आता है। एक तरफ वह सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए सैन्य सहयोग की प्रतिबद्धता जता रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान के साथ बातचीत के जरिए क्षेत्रीय तनाव कम करने की वकालत भी कर रहा है।
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र में जारी व्यापक संघर्ष को बातचीत के जरिए खत्म करने की कोशिशों का समर्थन करता है। पाकिस्तान पहले भी ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की मेजबानी कर चुका है।
ऐसे में इस्लामाबाद के सामने एक ओर सऊदी अरब के साथ रक्षा प्रतिबद्धता निभाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर क्षेत्रीय तनाव को बातचीत के जरिए कम करने की कोशिश जारी रखने का प्रयास भी है।

