तोपचांची में NGT नियमों के उल्लंघन की जांच के दौरान हंगामा, जिला परिषद उपाध्यक्ष को धमकाने का आरोप

तोपचांची में NGT नियमों के उल्लंघन की जांच के दौरान हंगामा, जिला परिषद उपाध्यक्ष को धमकाने का आरोप

धनबाद। जिले के तोपचांची प्रखंड के कालाझार में पत्थर क्रेसर और कथित अवैध पुल निर्माण से जुड़ी शिकायत की जांच के दौरान शुक्रवार को हंगामा हो गया। आरोप है कि जांच के लिए मौके पर पहुंची जिला परिषद की उपाध्यक्ष सरिता देवी को क्रेसर संचालक और उसके सहयोगियों ने डराने-धमकाने का प्रयास किया। स्थिति बिगड़ने के बाद उन्हें मौके से लौटना पड़ा।

मामला कतरी नदी पर कथित अवैध पुल निर्माण और पत्थर खदान एवं क्रेसर संचालन में राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी NGT के नियमों के उल्लंघन से जुड़ी शिकायत से संबंधित बताया जा रहा है। शिकायत के बाद प्रशासन की ओर से जांच कमिटी गठित की गई थी।

शिकायत के बाद गठित हुई जांच कमिटी

जिला परिषद की उपाध्यक्ष सरिता देवी ने इस मामले को लेकर लिखित शिकायत की थी। शिकायत में कतरी नदी पर कथित रूप से नियमों का उल्लंघन कर पुल निर्माण और पत्थर खदान से जुड़े पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी का मुद्दा उठाया गया था।

शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए प्रशासनिक स्तर पर कमिटी का गठन किया गया। शुक्रवार को इसी जांच के सिलसिले में टीम कालाझार पहुंची।

जांच कमिटी में जिला खनन पदाधिकारी (DMO) राकेश तिग्गा और तोपचांची अंचल अधिकारी (CO) नूपुर कुमारी समेत अन्य अधिकारी शामिल थे। जिला परिषद उपाध्यक्ष सरिता देवी भी कमिटी की सदस्य के तौर पर मौके पर पहुंचीं।

क्रेसर संचालक पर जांच में बाधा डालने का आरोप

मौके पर पहुंचने के बाद स्थिति उस समय बिगड़ गई, जब आरोप के मुताबिक क्रेसर संचालक अपने कुछ सहयोगियों के साथ जिला परिषद उपाध्यक्ष सरिता देवी और गिरिडीह सांसद प्रतिनिधि सुभाष रवानी से उलझ गए।

आरोप है कि दोनों को डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। इस दौरान मौके पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई और जांच की कार्रवाई प्रभावित हुई।

घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच भी तनाव की स्थिति बनी रही। जांच के लिए पहुंची टीम के सामने ही विवाद बढ़ने से कार्रवाई को आगे बढ़ाने में परेशानी हुई।

मौके से लौटना पड़ा जिला परिषद उपाध्यक्ष को

हंगामे के बाद जिला परिषद उपाध्यक्ष सरिता देवी को मौके से वापस लौटना पड़ा। आरोप है कि शिकायतकर्ता और जांच कमिटी की सदस्य को ही जांच स्थल से वापस जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल उठ रहा है कि जिस शिकायत की जांच के लिए प्रशासनिक कमिटी गठित की गई थी, उसकी जांच के दौरान शिकायतकर्ता के साथ ही कथित तौर पर डराने-धमकाने की स्थिति क्यों बनी।

मामले में अब प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर नजर है।

कतरी नदी पर कथित पुल निर्माण को लेकर उठे सवाल

पूरे विवाद का एक प्रमुख मुद्दा कतरी नदी पर कथित अवैध पुल निर्माण भी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नदी में ओबी पत्थर और सीमेंट पाइप डालकर रास्ता या पुल तैयार किया गया है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस तरह के निर्माण से नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पर्यावरणीय व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य में पर्यावरणीय नियमों और NGT से जुड़े प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए।

कतरी नदी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत मानी जाती है। स्थानीय स्तर पर नदी पर निर्भरता और उसके आसपास के प्राकृतिक संसाधनों को देखते हुए नदी में किसी भी तरह के निर्माण को लेकर पर्यावरणीय पहलुओं की जांच की मांग उठाई जा रही है।

जांच के नतीजे पर टिकी निगाहें

फिलहाल पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और मौके पर सामने आए विवाद के बाद आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। जांच कमिटी की रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि पत्थर खदान और क्रेसर से जुड़ी शिकायतों में कितनी वास्तविकता है और कथित पुल निर्माण में नियमों का पालन हुआ है या नहीं।

वहीं, जांच के दौरान जिला परिषद उपाध्यक्ष को कथित तौर पर धमकाने के आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।

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