लातेहार के जीराफूल चावल की प्रीमियम बाजार में एंट्री, महिलाओं को मिला 26.25 लाख रुपये का बड़ा ऑर्डर

लातेहार के जीराफूल चावल की प्रीमियम बाजार में एंट्री, महिलाओं को मिला 26.25 लाख रुपये का बड़ा ऑर्डर

रांची। झारखंड में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्थानीय कृषि उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। इसी क्रम में पलामू प्रमंडल के लातेहार जिले के प्रसिद्ध जीराफूल चावल की पैकेजिंग और मार्केटिंग का काम शुरू हो गया है।

महुआडांड़ क्षेत्र में उत्पादित पारंपरिक और सुगंधित जीराफूल चावल को अब संगठित बाजार और प्रीमियम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। इस पहल से स्थानीय महिलाओं को रोजगार और आय के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

किसान-से ने 25 टन चावल का दिया ऑर्डर

‘किसान-से’ एजीटेक प्राइवेट लिमिटेड ने नेतरहाट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड को 25 टन जीराफूल चावल खरीदने का आदेश दिया है। इस ऑर्डर का कुल मूल्य 26.25 लाख रुपये बताया गया है।

यह खरीद आदेश अप्रैल 2026 में जारी किया गया था। इसके तहत एक किलोग्राम और दो किलोग्राम के पैकेट तैयार किए जाएंगे। कुल 16,250 पैकेट तैयार करने की योजना पर काम चल रहा है।

इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादित चावल को ब्रांडेड और पैकेज्ड खाद्य उत्पाद के रूप में बाजार में पहचान दिलाने की दिशा में मदद मिलेगी।

लातेहार से गुरुग्राम भेजा गया 6.70 टन चावल

इसी कड़ी में 31 अगस्त 2026 को लगभग 6.70 टन जीराफूल चावल लातेहार से गुरुग्राम स्थित ‘किसान-से’ के वेयरहाउस के लिए रवाना किया गया।

इसे लातेहार के स्थानीय कृषि उत्पाद को बड़े और प्रीमियम बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण व्यावसायिक उपलब्धि माना जा रहा है। पैकेजिंग और संगठित विपणन के माध्यम से इस पारंपरिक चावल को व्यापक उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

पोषण और गुणवत्ता के कारण अलग पहचान

जीराफूल चावल अपनी विशिष्ट खुशबू, महीन दाने, मुलायम बनावट और अलग स्वाद के लिए जाना जाता है। उपलब्ध परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, इसमें प्रति 100 ग्राम 8.96 ग्राम प्रोटीन पाया गया है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 57 दर्ज किया गया है।

इसके अलावा चावल में कुल वसा, संतृप्त वसा और सोडियम की मात्रा भी कम पाई गई है। इन विशेषताओं के कारण यह स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच अलग पहचान बना सकता है।

हालांकि, किसी भी खाद्य उत्पाद के स्वास्थ्य संबंधी दावों को उपभोक्ताओं तक पहुंचाते समय प्रमाणित परीक्षण और निर्धारित मानकों का पालन आवश्यक होगा।

महुआडांड़ प्रोसेसिंग यूनिट से मजबूत हुई मूल्य शृंखला

लातेहार जिला प्रशासन की ओर से महुआडांड़ में स्थापित राइस कम पीनट प्रोसेसिंग यूनिट इस पूरी मूल्य शृंखला को मजबूत आधार दे रही है। इस इकाई का संचालन नेतरहाट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।

इस एफपीओ से लगभग 1,500 किसान जुड़े हुए हैं। जेएसएलपीएस की ओर से एफपीओ को सहयोग और मार्गदर्शन दिया गया है, जिससे किसानों के उत्पाद को प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार से जोड़ने में मदद मिली है।

सेतु सेल ने किसान और बाजार के बीच बनाया संपर्क

जेएसएलपीएस के सेतु सेल ने किसान, एफपीओ, प्रसंस्करण इकाई, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और बाजार के बीच आवश्यक समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस पहल के माध्यम से स्थानीय उत्पाद को केवल कच्चे कृषि माल के रूप में बेचने के बजाय मूल्यवर्धित और बाजार-उन्मुख उत्पाद के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि जीराफूल चावल की यह पहल झारखंड के अन्य स्थानीय कृषि उत्पादों के लिए भी उदाहरण बन सकती है। बेहतर प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार संपर्क के माध्यम से किसानों की आय और आजीविका के अवसरों को मजबूत किया जा सकता है।

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