पाकुड़। जिलेभर में करमा पर्व धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण इलाकों तक करमा पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। विभिन्न स्थानों पर पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की गई और लोगों ने करमा गीतों पर जमकर नृत्य किया।
करमा पर्व के दौरान पूरे जिले में पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली। महिलाओं के साथ परिवार के अन्य सदस्यों ने भी पर्व में हिस्सा लिया।
भाई की लंबी उम्र के लिए बहनों ने रखा उपवास
करमा पर्व पर बहनें अपने भाइयों की सुख-शांति, समृद्धि और लंबी उम्र की कामना के लिए दिनभर उपवास रखती हैं। भादो महीने की एकादशी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व में व्रत रखने के बाद शाम के समय पूजा-अर्चना की जाती है।
बहनें पूरे दिन उपवास रखकर शाम को करम डाली की पूजा करती हैं। इस दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है और भाई के सुखी एवं स्वस्थ जीवन की कामना की जाती है।
करम डाली पर धागा बांधकर होती है पूजा
करमा पर्व की पूजा में करम डाली का विशेष महत्व है। शाम के समय करम डाली पर धागा बांधकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।
स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा के दौरान परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। करमा पर्व से जुड़ी यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और आज भी लोग इसे श्रद्धा के साथ निभाते हैं।
नदी में करम डाली का विसर्जन, फिर टूटता है उपवास
पूजा के बाद अगले दिन सुबह करम डाली को नदी में विसर्जित किया जाता है। विसर्जन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बहनें अपना उपवास तोड़ती हैं।
करमा पर्व को लेकर लोगों में धार्मिक आस्था के साथ-साथ पारंपरिक उत्साह भी देखने को मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में पर्व की तैयारियां पहले से की गई थीं।
करमा गीतों पर जमकर थिरके लोग
करमा पर्व के दौरान विभिन्न स्थानों पर पारंपरिक करमा गीत गाए गए। गीतों के बीच लोगों ने उत्साह के साथ नृत्य किया। इससे पूरे इलाके में पर्व का माहौल और भी जीवंत हो गया।
करमा पर्व के आयोजन में लोक परंपरा, पारिवारिक भावनाओं और सामाजिक सहभागिता का संगम देखने को मिला। जिलेभर में लोगों ने श्रद्धा और उल्लास के साथ पर्व मनाया।

