पाकुड़। रेलवे फाटक पार सिंधी पाड़ा रोड स्थित एक जर्जर भवन को तोड़ने को लेकर मामला गरमा गया है। भवन को गिराने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भू-स्वामी देवाशीष प्रसाद और निताई प्रसाद ने नगर थाना में आवेदन देकर पुलिस प्रशासन से सहयोग की मांग की है।
भू-स्वामियों के अनुसार भवन काफी पुराना और जर्जर हो चुका है। उनका कहना है कि इसकी स्थिति ऐसी है कि यह कभी भी हादसे का कारण बन सकता है। इसी वजह से भवन को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
जमाबंदी और दाग संख्या का भी दिया गया उल्लेख
नगर थाना पुलिस के अनुसार जर्जर भवन को तोड़ने के संबंध में आवेदन प्राप्त हुआ है। पुलिस को दिए गए आवेदन में भवन की जमीन की जमाबंदी संख्या 145 और दाग संख्या 2575 का उल्लेख किया गया है।
भू-स्वामियों ने बताया कि भवन को तोड़ने की जिम्मेदारी साहिबगंज निवासी रितेश प्रसाद यादव को दी गई है। उनका कहना है कि जमीन की खरीद-बिक्री से संबंधित प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
दुकानदारों के दुकान खाली नहीं करने का दावा
भू-स्वामी पक्ष का कहना है कि पूर्व में उक्त भवन में दुकान चलाने वाले कुछ दुकानदार अब भी दुकान खाली नहीं कर रहे हैं। इसी वजह से भवन तोड़ने के दौरान विवाद उत्पन्न होने की आशंका जताई गई है।
इसी संभावित विवाद को देखते हुए भू-स्वामियों ने नगर थाना से पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि भवन को गिराने की प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े, इसके लिए पुलिस की मौजूदगी जरूरी है।
थाना प्रभारी ने कहा- सुरक्षा में नहीं होने दी जाएगी चूक
नगर थाना प्रभारी अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि भू-स्वामी की ओर से आवेदन प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की चूक नहीं होने दी जाएगी।
पुलिस मामले की स्थिति और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को देखते हुए आवश्यक कार्रवाई कर रही है।
एसडीओ ने बताया निजी जमीन का मामला
अनुमंडल पदाधिकारी साइमन मरांडी ने कहा कि मामला निजी जमीन से संबंधित है। उन्होंने बताया कि यदि निजी जमीन पर बना जर्जर भवन हादसे का कारण बन सकता है और भू-स्वामी उसे तोड़ना चाहता है, तो इस संबंध में किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा सकती।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भवन तोड़ने के दौरान किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो, इसका ध्यान रखा जाएगा।
एसडीओ के अनुसार, वहां मौजूद कुछ दुकानदारों का मामला दुकान के किराये से संबंधित प्रतीत होता है। इस मामले में अग्रेतर कार्रवाई की जा रही है।
फिलहाल जर्जर भवन को तोड़ने की प्रक्रिया और दुकानदारों से जुड़े विवाद को लेकर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

