होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान-ओमान में बनी सहमति, नए एंट्री-एग्जिट रूट की जानकारी खाड़ी देशों को देंगे

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान-ओमान में बनी सहमति, नए एंट्री-एग्जिट रूट की जानकारी खाड़ी देशों को देंगे

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए नए प्रवेश और निकास मार्गों पर सहमति बनाई है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत पूरी हो गई है। अब सोमवार को मस्कट में होने वाली क्षेत्रीय बैठक में खाड़ी देशों को इन नए रास्तों की जानकारी दी जाएगी।

होर्मुज के नए रूट पर बनी सहमति

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और ओमान के बीच बातचीत के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में आने-जाने के नए रास्तों की जानकारी तय की गई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। पश्चिम एशिया में मौजूदा तनाव के बीच इस जलमार्ग पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

ईरान और ओमान अब क्षेत्रीय बैठक में खाड़ी देशों के साथ अपनी बातचीत के नतीजे साझा करेंगे।

BRICS को लेकर पेजेश्कियान का बड़ा बयान

BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका की एकतरफा प्रतिबंध नीति पर निशाना साधा।

इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि BRICS का एक उद्देश्य ऐसे देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है, जो एकतरफा प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं।

पेजेश्कियान ने कहा कि BRICS देशों को प्रतिबंधों के बावजूद व्यापार और सहयोग के नए तरीके विकसित करने चाहिए।

एक-दूसरे का साथ देने की अपील

ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि BRICS के सदस्य देशों को एक-दूसरे की मदद और समर्थन करना चाहिए। उनका कहना है कि बातचीत, व्यापार और सहयोग के जरिए एकतरफा प्रतिबंधों के असर का मुकाबला किया जा सकता है।

उन्होंने BRICS को ऐसे मंच के रूप में बताया, जहां सदस्य देश मिलकर आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।

पश्चिम एशिया पर BRICS देशों की एक राय

इस बीच भारत के विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंधों के सचिव सुधाकर दलेला ने कहा कि BRICS देश पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति को लेकर एक साझा रुख बनाने पर सहमत हुए हैं।

उन्होंने कहा कि विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति को सबसे अहम माध्यम माना गया है।

कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान की सहमति ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।

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