काठमांडू: नेपाली सेना के प्रमुख जनरल अशोकराज सिगदेल रविवार (13 सितंबर, 2026) से एक हफ्ते की चीन यात्रा पर जाएंगे। हालांकि, नेपाल या चीन की ओर से अभी इस यात्रा की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन उनकी चीन यात्रा तय मानी जा रही है।
जनरल सिगदेल 13 सितंबर को चीन जाएंगे और 19 सितंबर को नेपाल लौटेंगे। पिछले साल नेपाली सेना की कमान संभालने के बाद यह उनकी पहली चीन यात्रा होगी। इसे नेपाल और चीन के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
बीजिंग शियांगशान फोरम में शामिल हो सकते हैं
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनरल सिगदेल 13वें बीजिंग शियांगशान फोरम में हिस्सा ले सकते हैं। यह फोरम 15 से 17 सितंबर तक बीजिंग इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होगा।
पिछले साल भी उन्हें इस फोरम में शामिल होने का निमंत्रण मिला था, लेकिन नेपाल में हुए जेन-जी आंदोलन और राजनीतिक तनाव के कारण उन्होंने अपनी यात्रा रद्द कर दी थी।
इस बार जनरल सिगदेल के चीन के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाकात करने की उम्मीद है।
सुरक्षा और रक्षा पर होगी चर्चा
बीजिंग शियांगशान फोरम अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। इसमें दुनिया के कई देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, रक्षा विशेषज्ञ और विद्वान शामिल होते हैं।
इस साल फोरम का विषय ‘स्थिरता पर सहमति बनाना और सुरक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाना’ रखा गया है।
बैठक में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, रणनीतिक स्थिरता, एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और विकासशील देशों की भूमिका जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। जनरल सिगदेल के भी फोरम को संबोधित करने की उम्मीद है।
चीन के साथ सैन्य अभ्यास पर भी चर्चा
जनरल सिगदेल की चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘सागरमाथा फ्रेंडशिप’ को लेकर भी चर्चा हो सकती है।
नेपाल और चीन की सेनाएं कई साल से यह संयुक्त अभ्यास करती आ रही हैं। इसका छठा संस्करण इस साल चीन में आयोजित किया जाना है।
यह अभ्यास पहली बार अप्रैल 2017 में शुरू हुआ था। इसका उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल बढ़ाना और सैन्य अनुभव साझा करना है।
अभ्यास में खास तौर पर ऊंचाई वाले इलाकों में ऑपरेशन, आपदा प्रबंधन और दोनों सेनाओं के बीच संयुक्त रूप से काम करने जैसी गतिविधियों पर जोर दिया जाता है।
जनरल सिगदेल की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब नेपाल और चीन के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की कोशिशें जारी हैं। ऐसे में उनकी चीन यात्रा को दोनों देशों के सैन्य संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

