JSSC-CGL नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत

JSSC-CGL नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC-CGL परीक्षा के विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने नियुक्तियां रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया।

इन मामलों में शालिनी सुंडी व अन्य, रोजलिन श्वेता तिग्गा एवं अन्य तथा ऋषिकेश सज्जन एवं अन्य याचिकाकर्ता हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर 2026 की तारीख तय की है।

18 अगस्त की अधिसूचना पर अगले आदेश तक रोक

हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना संख्या 06/लो.से.आ.-01-07/5408 के संचालन, क्रियान्वयन और अनुपालन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि इस अधिसूचना से प्रभावित नियुक्त कर्मचारियों को फिलहाल अपना काम जारी रखने दिया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह निर्देश केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समान स्थिति वाले अन्य प्रभावित कर्मचारियों पर भी लागू होगा।

इस आदेश के बाद विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत नियुक्त कर्मचारियों को तत्काल सेवा से हटाने की कार्रवाई पर फिलहाल रोक बनी रहेगी।

याचिकाकर्ताओं से अंडरटेकिंग दाखिल करने को कहा

हालांकि, हाईकोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं को अंडरटेकिंग दाखिल करने का निर्देश भी दिया है। इसमें उन्हें यह स्वीकार करना होगा कि आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट का अंतिम आदेश उन पर बाध्यकारी होगा।

अदालत ने कहा है कि ट्रायल कोर्ट के अंतिम आदेश के आधार पर राज्य सरकार कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेगी। यानी फिलहाल नियुक्त कर्मचारियों को राहत मिली है, लेकिन आपराधिक मामले के अंतिम परिणाम का प्रभाव आगे की कार्रवाई पर पड़ सकता है।

बिना नोटिस सेवा समाप्त करने पर कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स, कुमार अभिषेक और अर्पण एम. एक्का ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। अधिवक्ताओं ने कहा कि विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत याचिकाकर्ताओं की विधिवत नियुक्ति हुई थी।

उनका कहना था कि बाद में भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं, लेकिन कार्रवाई से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।

अदालत ने प्रथम दृष्टया टिप्पणी करते हुए कहा कि नियमित नियुक्ति को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना बाधित या समाप्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनौती दी गई अधिसूचना में फिलहाल ऐसे पर्याप्त आधार या सामग्री दिखाई नहीं देती, जो इतनी कठोर कार्रवाई को उचित ठहरा सके।

सरकार ने भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितता का दिया हवाला

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने अदालत को बताया कि विभिन्न नागरिकों की शिकायतों के आधार पर CID मामले की गहन जांच कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि जांच के दौरान कुछ गिरफ्तारियां हुई हैं।

सरकार की ओर से कहा गया कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आई है। इसी आधार पर विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत हुई नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया गया।

सुनवाई के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि फिलहाल सुविधा का संतुलन याचिकाकर्ताओं के पक्ष में है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिसूचना का क्रियान्वयन जनहित के प्रतिकूल है।

22 परीक्षाएं रद्द, 6 स्थगित और 17 जांच के दायरे में

उल्लेखनीय है कि CID जांच के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की रात संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी। कार्मिक विभाग की अधिसूचना में 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का उल्लेख किया गया है।

अब JSSC-CGL नियुक्तियों से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद प्रभावित कर्मचारियों को फिलहाल काम जारी रखने की अनुमति मिल गई है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी, जहां अदालत आगे की स्थिति पर सुनवाई करेगी।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *