हेग: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा के रहने वाले सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से जाना जाता है, इन दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं। उन्होंने अजनार नदी की सफाई का अभियान शुरू किया था। उनके इस काम की तारीफ अब विदेशी मीडिया और कई बड़ी हस्तियां भी कर रही हैं।
नीदरलैंड की पर्यावरण संस्था The Ocean Cleanup के संस्थापक और डच आविष्कारक बोयान स्लैट ने बिट्टू को अपनी संस्था के साथ काम करने का ऑफर दिया है। वहीं, पूर्व इंग्लैंड क्रिकेटर केविन पीटरसन ने भी उनके काम की सराहना की है।
The Independent ने की बिट्टू के काम की चर्चा
ब्रिटिश अखबार The Independent ने बिट्टू की कहानी पर रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट में बताया गया कि मध्य भारत के एक 21 वर्षीय छात्र ने कई महीनों तक गंदी नदी में उतरकर प्लास्टिक, बोतलें, शैवाल और दूसरी गंदगी निकाली।
रिपोर्ट के मुताबिक, सुरेंद्र सिंह चौधरी ने जनवरी में मध्य प्रदेश की अजनार नदी की सफाई शुरू की थी। शुरुआत में कुछ दोस्त भी उनके साथ जुड़े थे, लेकिन बाद में उन्होंने ज्यादातर काम अकेले ही जारी रखा।
बिट्टू ने साधारण औजारों और अपने हाथों की मदद से नदी से कचरा निकालने का काम किया।
Gulf News ने भी किया जिक्र
Gulf News ने भी बिट्टू के अभियान पर रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट में बताया गया कि वह जल स्रोतों की सफाई के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
बिट्टू नदी से प्लास्टिक कचरे, बोतलों, शैवाल और दूसरी गंदगी को निकालते हैं। वह अपने सफाई अभियान की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी शेयर करते हैं।
The Ocean Cleanup से मिला नौकरी का ऑफर
बिट्टू के काम से प्रभावित होकर The Ocean Cleanup के संस्थापक बोयान स्लैट ने सोशल मीडिया पर उन्हें नौकरी का ऑफर दिया।
बिट्टू के काम की तस्वीरें देखने के बाद उन्होंने लिखा, “हमारे साथ आकर काम करो।” इस ऑफर के बाद बिट्टू की कहानी को और ज्यादा अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।
आनंद महिंद्रा और केविन पीटरसन ने भी सराहा
उद्योगपति आनंद महिंद्रा भी बिट्टू के काम की तारीफ कर चुके हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बिट्टू को अपना #MondayMotivation बताया था।
वहीं, पूर्व इंग्लैंड क्रिकेटर केविन पीटरसन ने भी नदी की सफाई के लिए बिट्टू के प्रयासों की सराहना की है।
अजनार नदी से शुरू हुआ बिट्टू का सफाई अभियान अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। एक 21 वर्षीय युवक का यह प्रयास पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों का ध्यान खींच रहा है।

