286 दिन समुद्र में रहने के बाद थाईलैंड पहुंचे 5,000 अमेरिकी नाविक, पटाया में जमकर हुआ विवाद

286 दिन समुद्र में रहने के बाद थाईलैंड पहुंचे 5,000 अमेरिकी नाविक, पटाया में जमकर हुआ विवाद

बैंकॉक: अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln के करीब 5,000 नाविक 286 दिन समुद्र में रहने के बाद थाईलैंड के पटाया पहुंचे। यहां पांच दिनों के ठहराव के दौरान सैनिकों की गतिविधियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

6 सितंबर को USS Abraham Lincoln थाईलैंड से वापस रवाना हो गया। थाई मीडिया के मुताबिक, सैनिकों के आने से पहले ही स्थानीय पुलिस ने शहर के समुद्र किनारे वाले मुख्य इलाके में सार्वजनिक वेश्यावृत्ति के खिलाफ देर रात कार्रवाई की थी।

पटाया की अर्थव्यवस्था को फायदा होने की उम्मीद

पटाया के मेयर पोरामासे नगाम्पिचेस के मुताबिक, एक अमेरिकी सैनिक रोजाना करीब 1,000 से 3,000 थाई बाट तक खर्च कर सकता है। ऐसे में हजारों सैनिकों के पांच दिन रुकने से स्थानीय कारोबार को फायदा होने की उम्मीद जताई गई।

USS Abraham Lincoln के पहुंचने के बाद पटाया के मनोरंजन और रेड-लाइट इलाकों में अमेरिकी सैनिकों के घूमने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। कुछ वीडियो में सैनिकों को स्थानीय बार में पार्टी करते हुए भी देखा गया।

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पटाया को सैनिकों के मनोरंजन और सेक्स वर्क से जुड़ी सेवाओं के लिए चुना गया था। हालांकि, ऐसे दावों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास सेक्स वर्क का पुराना इतिहास

विदेशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास सेक्स वर्क का इतिहास काफी पुराना रहा है। जर्मनी, दक्षिण कोरिया, जापान और फिलीपींस समेत कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास ऐसे इलाके विकसित हुए।

इतिहास में सैन्य ठिकानों के आसपास स्थानीय महिलाओं के मनोरंजन, कपड़े धोने और दूसरे काम करने के साथ सेक्स वर्क से जुड़े उदाहरण भी मिलते हैं। हालांकि, अलग-अलग देशों और समय में इसकी परिस्थितियां अलग रही हैं।

भारत में भी रहा है ऐसा इतिहास

18वीं और 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास जैसे बंदरगाह शहरों के आसपास सैन्य इलाकों से जुड़े सेक्स वर्क के क्षेत्र मौजूद थे।

1864 के कैंटोनमेंट एक्ट के तहत ब्रिटिश सैन्य छावनियों के आसपास सेक्स वर्क को नियंत्रित करने की व्यवस्था की गई थी। इसके तहत सैनिकों के संपर्क में आने वाली महिलाओं का रजिस्ट्रेशन और स्वास्थ्य जांच जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई थीं।

जापानी सेना का ‘कम्फर्ट वुमेन’ सिस्टम

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना ने ‘कम्फर्ट वुमेन’ नाम से एक व्यवस्था चलाई थी। इतिहासकारों के अनुसार, इसके तहत एशिया के कई हिस्सों की बड़ी संख्या में महिलाओं को यौन शोषण और जबरन सेक्स वर्क का सामना करना पड़ा।

युद्ध के बाद दक्षिण कोरिया में कुछ ऐसे इलाकों में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी बढ़ी, जहां सेक्स वर्क पहले से मौजूद था। इसके बाद अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास ‘कैंपटाउन’ विकसित हुए।

दक्षिण कोरिया में सबसे ज्यादा चर्चा

दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास बने कैंपटाउन लंबे समय तक देश की अर्थव्यवस्था और स्थानीय समाज का हिस्सा रहे हैं।

1961 के एक दक्षिण कोरियाई सरकारी दस्तावेज के अनुसार, उस समय सियोल में अमेरिकी सैनिकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में सेक्स वर्कर्स मौजूद थीं।

पटाया की हालिया घटना ने एक बार फिर अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उनके आसपास विकसित मनोरंजन व सेक्स वर्क से जुड़े पुराने इतिहास को चर्चा में ला दिया है।

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