मुंबई में 13 जुलाई 2011 को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में आरोपी नदीम अख्तर अशफाक शेख अब वकालत के पेशे से जुड़ गए हैं। 36 वर्षीय नदीम ने करीब 14 साल आर्थर रोड जेल में बिताए और इसी दौरान कानून की पढ़ाई पूरी की। इस वर्ष फरवरी में बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद उन्होंने महाराष्ट्र एवं गोवा बार काउंसिल से वकालत की सनद हासिल की और अब अदालतों में आपराधिक मामलों की पैरवी कर रहे हैं।
हालांकि, नदीम के खिलाफ मुंबई 13/7 बम धमाकों से जुड़ा मामला अभी लंबित है और वह कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।
दरभंगा से मुंबई और फिर जेल तक का सफर
नदीम अख्तर अशफाक शेख का जन्म बिहार के दरभंगा में हुआ था। वर्ष 2002 में वह मुंबई आकर भायखला इलाके में रहने लगे। उस समय वह बीकॉम की पढ़ाई कर रहे थे और पिज्जा डिलीवरी का काम भी करते थे। साथ ही वह अपने एक रिश्तेदार के सिम कार्ड कारोबार में मदद करते थे।
13 जुलाई 2011 को मुंबई के ओपेरा हाउस, जवेरी बाजार और दादर इलाके में हुए तीन बम धमाकों में 27 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 127 लोग घायल हुए थे।
जांच के दौरान यह सामने आया कि मामले के कुछ आरोपियों ने नदीम के रिश्तेदार की दुकान से सिम कार्ड खरीदे थे। इसी आधार पर जनवरी 2012 में 22 वर्षीय नदीम को नागपाड़ा इलाके से गिरफ्तार किया गया। मामले में उन पर MCOCA समेत अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की गई।
आर्थर रोड जेल में पूरी की कानून की पढ़ाई
जेल में रहते हुए नदीम ने अपनी पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया। वर्ष 2014 में उन्होंने ओपन यूनिवर्सिटी के माध्यम से बीए की डिग्री पूरी की।
इसके बाद वर्ष 2019 में उन्होंने स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट पास किया और ठाणे के एक लॉ कॉलेज में प्रवेश लिया। बताया गया कि उन्होंने जेल में रहकर पढ़ाई की और अदालत की अनुमति तथा पुलिस सुरक्षा के बीच लॉ की परीक्षाएं दीं।
उनकी पढ़ाई में जमीयत-उलमा-ए-हिंद की ओर से आर्थिक सहयोग मिलने की भी बात सामने आई है।
ट्रायल में देरी के आधार पर मिली जमानत
नदीम को इस वर्ष 10 फरवरी को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिली। जमानत देते समय अदालत ने मामले के ट्रायल में हो रही देरी को भी ध्यान में रखा।
जानकारी के अनुसार, मामले में 400 से अधिक गवाह हैं, लेकिन करीब 10 वर्षों के दौरान केवल 167 गवाहों से ही पूछताछ पूरी हो सकी थी। अदालत ने माना कि निकट भविष्य में मुकदमे के समाप्त होने की संभावना कम दिखाई दे रही है।
जेल में बिताए लंबे समय के दौरान नदीम के पिता का भी निधन हो गया था।
सनद मिलने के बाद शुरू की आपराधिक मामलों की वकालत
जुलाई में महाराष्ट्र एवं गोवा बार काउंसिल से सनद मिलने के बाद नदीम ने अदालत में वकालत शुरू की। उन्होंने काला गाउन पहनकर अपने पेशेवर जीवन की नई शुरुआत की।
बताया गया कि उनका पहला मामला हत्या के एक आरोपी से जुड़ा था। अब तक वह चार मामलों की पैरवी कर चुके हैं, जिनमें से एक मामले की वकालत वह बिना शुल्क लिए कर रहे हैं।
नदीम के अनुसार, वकालत के जरिए अब तक उनकी करीब 50 हजार रुपये की आय हुई है।
खुद को निर्दोष साबित करने की कानूनी लड़ाई जारी
नदीम का कहना है कि उनके खिलाफ लंबित मामले की जानकारी उनके मुवक्किलों को है और उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है। उनका मानना है कि जेल में लंबे समय तक रहने के कारण वह कैदियों और आरोपियों की कानूनी व व्यक्तिगत परेशानियों को बेहतर ढंग से समझते हैं।
14 साल तक जेल में रहने के बाद अब नदीम अपने परिवार के साथ समय बिता रहे हैं। साथ ही, वह एक ओर दूसरे आरोपियों की कानूनी मदद कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर अपने खिलाफ लंबित मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखे हुए हैं।

