रांची। झारखंड में चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों के दौरान राजस्व संग्रहण निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले पीछे रहा है। निर्धारित 41 प्रतिशत राजस्व संग्रहण के लक्ष्य की तुलना में अब तक केवल 34.05 प्रतिशत ही संग्रह हो सका है। इसे लेकर वित्त एवं वाणिज्य कर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वाणिज्य कर विभाग के कामकाज पर नाराजगी जताई है।
झारखंड भवन में वित्त एवं वाणिज्य कर मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में राज्य के राजस्व संग्रहण की वर्तमान स्थिति और निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध उपलब्धि की विस्तार से समीक्षा की गई।
राजस्व लक्ष्य पूरा करने के साथ कर चोरी रोकने पर जोर
बैठक में व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के निरीक्षण, लंबित ऑडिट आपत्तियों, न्यायालयों में लंबित मामलों, VAT और GST की बकाया राशि तथा राजस्व के संभावित स्रोतों पर चर्चा की गई।
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राजस्व संग्रहण को केवल लक्ष्य प्राप्ति तक सीमित नहीं रखा जाए। उन्होंने कर चोरी की रोकथाम और बकाया राजस्व की वसूली को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि जिन मामलों में ऑडिट आपत्तियां लंबे समय से लंबित हैं, उनमें विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई करते हुए तय समय सीमा के भीतर निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।
माइंस, रियल एस्टेट और ट्रांसपोर्टेशन क्षेत्रों की विशेष समीक्षा
समीक्षा बैठक में राजस्व की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। इनमें माइंस, रियल एस्टेट और ट्रांसपोर्टेशन जैसे क्षेत्र शामिल रहे।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन क्षेत्रों में कारोबार के वास्तविक स्तर और घोषित कारोबार के बीच किसी भी प्रकार की विसंगति मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
उन्होंने अवैध खनिज परिवहन से GST राजस्व को होने वाले नुकसान पर भी प्रभावी कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बड़े बकायेदारों की सूची बनाकर चलाया जाएगा वसूली अभियान
बैठक में VAT और GST से संबंधित बकाया राशि की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की गई। वित्त मंत्री ने अधिकारियों को बड़े बकायेदारों की सूची तैयार करने और प्राथमिकता के आधार पर राजस्व वसूली अभियान चलाने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि बकाया राशि की वसूली के लिए विभाग को प्रभावी रणनीति के साथ काम करना होगा। कर चोरी रोकने और बकाया राजस्व की वसूली में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
GST Rationalisation से 4 हजार करोड़ नुकसान का अनुमान
बैठक के दौरान मंत्री ने राज्य के वित्तीय संसाधनों पर पड़ने वाले संभावित दबाव का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, GST Rationalisation के कारण झारखंड को करीब 4,000 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि VB-G RAM-G में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी में बदलाव से भी राज्य पर करीब 4,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आने का अनुमान लगाया गया है।
मंत्री ने कहा कि केंद्र स्तर पर लिए गए विभिन्न निर्णयों के कारण राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
MMDR Amendment Act 2026 से 14 हजार करोड़ नुकसान की आशंका
राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि MMDR Amendment Act, 2026 के प्रावधान झारखंड के लिए विशेष चिंता का विषय हैं।
उन्होंने बताया कि नए प्रावधानों में राज्य सरकारों द्वारा खनिज अधिकारों और खनिज युक्त भूमि पर टैक्स, सेस या अन्य शुल्क लगाने को केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन रखने का प्रावधान है।
मंत्री के अनुसार, यदि संशोधन लागू होता है तो झारखंड को करीब 14,000 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े राजस्व नुकसान का असर राज्य की विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ सकता है।
वाणिज्य कर विभाग को मिला है 24 हजार करोड़ का लक्ष्य
वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष कुल 46,000 करोड़ रुपये के राजस्व संग्रहण लक्ष्य में से अकेले वाणिज्य कर विभाग को 24,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया है।
उन्होंने कहा कि राज्य को सबसे अधिक राजस्व वाणिज्य कर विभाग से प्राप्त होता है। इसलिए विभाग के अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मंत्री ने कहा कि विभाग को वाहन और अन्य आधारभूत संसाधन उपलब्ध कराना तथा मानव संसाधन की कमी को दूर करना सरकार और विभागीय नेतृत्व की जिम्मेदारी है। साथ ही अधिकारियों से भी अपेक्षा की जाती है कि वे कर चोरी रोकने, बकाया राजस्व की वसूली और अवैध खनिज परिवहन से होने वाले GST नुकसान पर प्रभावी कार्रवाई करें।
दिसंबर की समीक्षा बैठक में खराब प्रदर्शन पर कार्रवाई की चेतावनी
वित्त मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि दिसंबर माह में होने वाली अगली समीक्षात्मक बैठक में जिन अधिकारियों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया जाएगा, उन्हें चिह्नित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने अधिकारियों से राजस्व संग्रहण में तेजी लाने और निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूरी गंभीरता के साथ कार्य करने का निर्देश दिया।
बैठक में वाणिज्य कर विभाग के सचिव, अपर आयुक्त, संयुक्त आयुक्त, उपायुक्त, सहायक आयुक्त और अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

