चीन-नेपाल सीमा पर भीषण बाढ़ से तबाही, 1500 से ज्यादा लोग लापता

चीन-नेपाल सीमा पर भीषण बाढ़ से तबाही, 1500 से ज्यादा लोग लापता

चीन-नेपाल सीमा पर आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। तिब्बत से आया तेज सैलाब नेपाल के कई इलाकों में घुस गया। पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई इमारतें, पुल, सड़कें और गाड़ियां तक बह गईं।

बाढ़ ने नेपाल के कई गांवों और शहरों को प्रभावित किया है। इस घटना ने लोगों को 2013 में उत्तराखंड की केदारनाथ में आई विनाशकारी बाढ़ की याद दिला दी है।

कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को नुकसान

बाढ़ और मलबे की वजह से कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा कई सड़कों और पुलों के भी बहने की जानकारी सामने आई है।

नेपाल में बाढ़ के बाद भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में भी खतरा बढ़ गया है। दोनों राज्यों में प्रशासन को अलर्ट किया गया है।

1500 से ज्यादा लोग लापता

रिपोर्ट के मुताबिक, इस आपदा में अब तक करीब 359 लोगों की मौत हुई है, जबकि 1500 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में करीब 288 भारतीय शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं की बताई जा रही है।

अधिकारियों ने आशंका जताई है कि राहत और बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव हो सकता है।

कई जिलों में फैला बाढ़ का पानी

सुबह करीब 9 बजे भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आने की जानकारी मिली। इसका सबसे ज्यादा असर तिब्बत सीमा से लगे रसुवा और धादिंग जिलों में देखने को मिला।

तिमुरे इलाके में बाढ़ का पानी और मलबा भोटेकोशी से होते हुए त्रिशूली नदी तक पहुंच गया। इसके बाद नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी समेत कई जिलों में भी बाढ़ का असर देखने को मिला।

सेना और पुलिस ने संभाला मोर्चा

बाढ़ के बाद नेपाल सरकार ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस और नेपाल पुलिस की टीमें प्रभावित इलाकों में भेजी गई हैं।

नेपाली सेना ने बचाव अभियान के लिए 12 हेलीकॉप्टर लगाए हैं। सुरक्षा बलों ने अलग-अलग जगहों पर फंसे 100 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है।

हालांकि, रसुवा के स्याप्रु बेसी और तिमुरे जैसे इलाकों में खराब हालात के कारण हेलीकॉप्टर उतारने में परेशानी आ रही है। सेना ने त्रिशूली में एक मेडिकल सेंटर भी बनाया है और अस्पताल की मदद के लिए हेलीकॉप्टर भेजा गया है।

अभी भी बना हुआ है खतरा

नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने लोगों को नदियों से दूर रहने की सलाह दी है। अधिकारियों के मुताबिक, नदी के रास्ते में पानी जमा होने के कारण बनी झील का पानी अभी पूरी तरह बाहर नहीं निकला है।

इस वजह से भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में खतरा अभी भी बना हुआ है। लोगों से सुरक्षित जगहों पर रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

भूकंप के बाद बाढ़ आने की आशंका

नेपाल के विदेश मंत्री ने संसद में बताया कि सुबह करीब 8:37 बजे तिब्बत में भूकंप आया था। इसके कुछ ही मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की जानकारी मिली।

वैज्ञानिकों और अधिकारियों को आशंका है कि भूकंप के झटकों के कारण ग्लेशियर या पहाड़ी क्षेत्र में अचानक हलचल हुई होगी, जिससे बाढ़ की स्थिति बनी। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज के अनुसार, इस इलाके में करीब 4.4 तीव्रता का भूकंप भी दर्ज किया गया था।

फिलहाल नेपाल में बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान जारी है और प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है।

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