हॉर्मुज पर ईरान का बड़ा एक्शन, भारत समेत 10 देशों के 45 जहाजों पर लगाया प्रतिबंध

हॉर्मुज पर ईरान का बड़ा एक्शन, भारत समेत 10 देशों के 45 जहाजों पर लगाया प्रतिबंध

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर बड़ा कदम उठाया है। ईरान ने 45 जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन जहाजों में भारत और पाकिस्तान के जहाज भी शामिल हैं। ईरान का आरोप है कि इन जहाजों ने हॉर्मुज से जुड़े उसके नियमों का पालन नहीं किया।

प्रतिबंधित जहाजों में भारत, पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, ग्रीस, कतर, नीदरलैंड्स, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और नॉर्वे से जुड़े जहाज शामिल हैं। भारत के दो जहाजों को इस सूची में रखा गया है।

नियम नहीं मानने पर कार्रवाई की चेतावनी

ईरान की पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने रविवार को कहा था कि हॉर्मुज से गुजरने वाले जिन जहाजों ने ईरान के नियमों का पालन नहीं किया, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

अथॉरिटी के मुताबिक, नियम तोड़ने वाले जहाजों पर जुर्माना लगाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर उन्हें हिरासत में लेने या जब्त करने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।

PGSA ने पर्शियन गल्फ से कारोबार करने वाली कंपनियों और व्यापारियों को भी सावधान किया है। अथॉरिटी ने कहा कि किसी जहाज को किराए पर लेने से पहले उसकी वेबसाइट पर मौजूद प्रतिबंधित या नियमों का पालन न करने वाले जहाजों की सूची जरूर देख लें।

हॉर्मुज से कम गुजर रहे हैं जहाज

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाजों की आवाजाही अभी भी सामान्य से काफी कम है। मंगलवार को यहां से सिर्फ 5 कमोडिटी जहाज गुजरे। यह संख्या सोमवार के लगभग बराबर थी, लेकिन पिछले 10 दिनों के औसत 15 जहाजों की तुलना में काफी कम है।

Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को दो LPG टैंकर और एक बिटुमेन टैंकर हॉर्मुज से बाहर निकले। वहीं, दो खाली प्रोडक्ट टैंकर इस जलमार्ग में दाखिल हुए।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बरकरार

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष फिलहाल थम चुका है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी के संकेत दिए हैं।

अमेरिका अब ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक दबाव बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। ऐसे में फिलहाल दोबारा बड़े सैन्य हमले की संभावना कम मानी जा रही है।

हालांकि, हॉर्मुज को लेकर ईरान के नए फैसले से क्षेत्र में तनाव और समुद्री व्यापार पर दबाव बढ़ सकता है।

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