हिमाचल प्रदेश में बुधवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह करीब 5:46 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.0 मापी गई। भूकंप के झटके करीब तीन सेकेंड तक महसूस किए गए।
अचानक धरती हिलने से कई लोग घबरा गए और अपने घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों पर पहुंच गए। हालांकि, कुछ देर बाद जब कंपन बंद हुआ तो लोग वापस अपने घरों में लौट गए। फिलहाल भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है।
शिमला समेत कई जिलों में महसूस हुए झटके
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र शिमला से करीब 66 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण दिशा में, जमीन से लगभग 10 किलोमीटर नीचे था।
शिमला के अलावा सोलन, सिरमौर, बिलासपुर और मंडी के कुछ इलाकों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए।
हिमाचल प्रदेश भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील राज्यों में शामिल है। राज्य के कई इलाके भूकंप के उच्च जोखिम वाले जोन-4 और जोन-5 में आते हैं।
4.0 तीव्रता का भूकंप कितना खतरनाक?
विशेषज्ञों के मुताबिक 5.0 से कम तीव्रता वाले भूकंप से आमतौर पर बड़े स्तर पर नुकसान की संभावना कम होती है। हालांकि, भूकंप की गहराई और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर इसका असर अलग-अलग हो सकता है।
भूकंप की तीव्रता जितनी ज्यादा होती है, नुकसान का खतरा भी उतना ही बढ़ता जाता है।
लद्दाख में भी हाल में महसूस हुए भूकंप के झटके
हिमाचल से पहले लद्दाख में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। सोमवार सुबह लेह-लद्दाख में 3.5 तीव्रता का भूकंप आया था। इससे एक दिन पहले भी इलाके में 4.6 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया था।
लगातार भूकंप के झटकों के कारण इस क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियों को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है।
भूकंप की तीव्रता बढ़ने पर बढ़ता है खतरा
आम तौर पर कम तीव्रता वाले भूकंप से नुकसान कम होता है, जबकि ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं। 7.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप बड़े स्तर पर तबाही मचा सकते हैं और इमारतों, सड़कों व अन्य ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
फिलहाल हिमाचल में आए 4.0 तीव्रता के भूकंप के बाद किसी बड़े नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है।

