गंभीर कोरोना संक्रमण से जुड़ी एक नई रिसर्च में शरीर में पहले से मौजूद कुछ वायरस के दोबारा सक्रिय होने की बात सामने आई है। यह अध्ययन Nature में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों ने 1,154 ऐसे मरीजों का अध्ययन किया, जिन्हें COVID-19 के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रिसर्च में पाया गया कि गंभीर संक्रमण के दौरान कई पुराने वायरस फिर से सक्रिय हो सकते हैं और यह प्रक्रिया बीमारी की गंभीरता और कुछ मामलों में लॉन्ग कोविड से जुड़ी हो सकती है।
क्या होते हैं सुप्त वायरस?
हमारे शरीर में कुछ वायरस संक्रमण के बाद लंबे समय तक मौजूद रह सकते हैं। आमतौर पर ये शांत अवस्था में रहते हैं और शरीर की इम्यून सिस्टम इन्हें नियंत्रित रखती है।
रिसर्च में खास तौर पर एपस्टीन-बार वायरस (EBV), साइटोमेगालोवायरस (CMV), हर्पीस वायरस और एनेलोविरिडे परिवार के वायरस के दोबारा सक्रिय होने के संकेत मिले।
गंभीर कोरोना में क्यों सक्रिय हुए वायरस?
वैज्ञानिकों के मुताबिक गंभीर COVID-19 शरीर में तेज सूजन और इम्यून सिस्टम में बड़े बदलाव पैदा कर सकता है। ऐसे शारीरिक तनाव के दौरान पहले से मौजूद कुछ वायरस दोबारा सक्रिय हो सकते हैं।
अध्ययन में करीब 48 प्रतिशत मरीजों में किसी न किसी पुराने वायरस के दोबारा सक्रिय होने के संकेत मिले। हालांकि, अलग-अलग वायरस अलग-अलग समय पर सक्रिय हुए।
फेफड़ों पर क्या असर पड़ सकता है?
रिसर्च में कुछ वायरस, खासकर CMV और HSV-1, श्वसन तंत्र से लिए गए नमूनों में भी पाए गए। इन वायरस की सक्रियता बीमारी की गंभीरता और शरीर में बढ़ी हुई सूजन से जुड़ी मिली।
हालांकि, यह कहना अभी सही नहीं होगा कि इन वायरस के सक्रिय होने से भविष्य में सामान्य फ्लू या सर्दी-जुकाम सीधे तौर पर जानलेवा हो जाएगा। वैज्ञानिकों ने खुद स्पष्ट किया है कि मौजूदा अध्ययन वायरस के दोबारा सक्रिय होने और खराब स्वास्थ्य परिणामों के बीच संबंध दिखाता है, लेकिन इससे कारण और परिणाम साबित नहीं होता।
क्या थकान और लॉन्ग कोविड से भी संबंध है?
रिसर्च में एनेलोविरिडे परिवार के वायरस की सक्रियता का लॉन्ग कोविड से संबंध पाया गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि पुराने वायरस की सक्रियता, शरीर की सूजन और इम्यून सिस्टम में बदलाव लॉन्ग कोविड को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, इसके पीछे की पूरी प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है।
रिसर्च का सबसे बड़ा निष्कर्ष
इस अध्ययन से पता चलता है कि गंभीर COVID-19 के दौरान शरीर में मौजूद पुराने वायरस दोबारा सक्रिय हो सकते हैं। यह प्रक्रिया बीमारी की गंभीरता, सूजन और कुछ लंबे समय तक रहने वाले स्वास्थ्य प्रभावों से जुड़ी हो सकती है।
लेकिन इसे इस तरह नहीं समझना चाहिए कि गंभीर कोरोना झेल चुके हर व्यक्ति के फेफड़े कमजोर हो जाएंगे या उसे भविष्य में मामूली संक्रमण से गंभीर खतरा होगा। इस दिशा में अभी और रिसर्च की जरूरत है।
ध्यान दें : यह जानकारी एक वैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित है। किसी व्यक्ति में लंबे समय तक सांस फूलना, लगातार थकान या अन्य लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

