केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने बीजेपी सांसद कंगना रनौत के ‘गटर जनरेशन’ वाले बयान पर नाराजगी जताई है। ABP न्यूज से खास बातचीत में चिराग पासवान ने कहा कि किसी एक संगठन या पार्टी के कुछ लोगों की बातों के आधार पर पूरी पीढ़ी को गलत कहना सही नहीं है।
दरअसल, हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने जेन-ज़ी को लेकर कथित तौर पर ‘गटर लेवल के लोग’ टिप्पणी की थी। बाद में जब उनसे इस बयान को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने माफी मांगने के बजाय अपने बयान का बचाव किया।
‘मैं खुद ऐसी बातों से परेशान हूं’–चिराग
कंगना के बयान पर सवाल पूछे जाने पर चिराग पासवान ने कहा कि हर संगठन और पार्टी में अलग-अलग तरह के लोग होते हैं। कई बार अपनी पार्टी के नेताओं की बातों या कामों से भी वह नाराज होते हैं और उनसे सवाल करते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के गलत बयान को पूरे संगठन या व्यवस्था से जोड़ना सही नहीं है। चिराग ने कहा कि उनके लिए सबसे ज्यादा मायने यह रखता है कि सरकार का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति क्या सोचता है और देश के लिए उसकी क्या सोच है।
पीएम मोदी पर जताया भरोसा
चिराग पासवान ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा करते हैं और उसी विश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी उनके प्रधानमंत्री हैं और उनकी सोच व नेतृत्व उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
‘संगठन में कई लोग उटपटांग बातें करते हैं’
चिराग पासवान ने कहा कि बड़े संगठनों में समय-समय पर कुछ लोग ऐसी बातें बोल देते हैं, जिनसे वह खुद सहमत नहीं होते। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार नेताओं की ओर से सांप्रदायिकता से जुड़ी टिप्पणियां भी सुनने को मिलती हैं, लेकिन वह ऐसी बातों के पक्षधर नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति के बयान के कारण पूरे सिस्टम या संगठन को गलत ठहराना उचित नहीं है।
कंगना के बयान को बताया गलत
चिराग पासवान ने कंगना रनौत के बयान पर स्पष्ट रूप से कहा कि एक संगठन या समूह की आलोचना करते-करते पूरी पीढ़ी को ‘गटर’ कहना गलत है।
उन्होंने कहा कि जब कोई नेता अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करता है तो संबंधित पार्टी या संगठन उसे टोकता भी है। उन्होंने कहा कि वह अपनी पार्टी के नेताओं को भी गलत बातों पर टोकते हैं और बीजेपी भी अपने नेताओं को ऐसा करने से रोकती है।
चिराग पासवान ने कहा कि बड़े राजनीतिक संगठनों में हर व्यक्ति के बयान की जिम्मेदारी लेना संभव नहीं है, लेकिन गलत भाषा का इस्तेमाल होने पर उसे लेकर सवाल जरूर उठाए जाने चाहिए।
