स्वतंत्रता दिवस पर बन्नी के घास के मैदानों में छोड़े गए 20 काले हिरण, वनतारा ने की मदद

स्वतंत्रता दिवस पर बन्नी के घास के मैदानों में छोड़े गए 20 काले हिरण, वनतारा ने की मदद

जामनगर/कच्छ, 16 अगस्त 2026: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गुजरात वन विभाग ने ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर (GZRRC) यानी वनतारा के तकनीकी सहयोग से कच्छ के बन्नी क्षेत्र में 20 काले हिरणों को उनके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा। इस पहल के तहत 5 नर और 15 मादा काले हिरणों का पुनर्वास किया गया।

वन विभाग के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य बन्नी क्षेत्र में स्थानीय वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने और प्राकृतिक पर्यावरण को मजबूत करना है।

5 नर और 15 मादा काले हिरणों का पुनर्वास

वनतारा से 20 काले हिरणों को जामनगर से बन्नी लाया गया। स्थानांतरण के लिए गुजरात के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) से आवश्यक मंजूरी ली गई।

स्थानांतरण से पहले सभी काले हिरणों की स्वास्थ्य जांच, क्वारंटीन और सुरक्षित परिवहन सहित जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। इसके बाद उन्हें बन्नी के घास के मैदानों में छोड़ा गया।

बन्नी में स्थानीय वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने पर जोर

इस पहल का उद्देश्य केवल 20 काले हिरणों को बन्नी में छोड़ना नहीं है। इसके माध्यम से क्षेत्र में स्थानीय शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने और प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

बन्नी क्षेत्र में काले हिरणों के अलावा चिंकारा, नीलगाय और जंगली सूअर जैसे स्थानीय वन्यजीव भी पाए जाते हैं। वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने के साथ उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

वन विभाग ने बताया महत्वपूर्ण कदम

गुजरात के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. जयपाल सिंह, आईएफएस ने कहा कि स्थानीय वन्यजीवों को दोबारा उनके प्राकृतिक वातावरण में बसाना स्वस्थ पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस पर बन्नी में 20 काले हिरणों को छोड़ने को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने कहा कि इस तरह के संरक्षण कार्यों के लिए वैज्ञानिक तरीके, लगातार निगरानी और संबंधित लोगों का सहयोग जरूरी है। उन्होंने अभियान में वनतारा के तकनीकी सहयोग के लिए आभार जताया।

500 काले हिरण और 100 चिंकारा के संरक्षण कार्यक्रम का हिस्सा

बन्नी में काले हिरणों को छोड़ने की पहल गुजरात में स्थानीय शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने के लिए चल रहे बड़े कार्यक्रम का हिस्सा है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने गुजरात में 500 काले हिरणों और 100 चिंकारों को अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर बसाने की मंजूरी दी है।

इस कार्यक्रम का एक हिस्सा प्रस्तावित चीता पुनर्वास योजना के तहत वन्यजीवों के लिए भोजन की उपलब्धता बढ़ाने से जुड़ा है। वहीं, बन्नी में काले हिरणों के पुनर्वास का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में पहले से पाए जाने वाले स्थानीय वन्यजीवों की संख्या बढ़ाना है।

वनतारा ने उपलब्ध कराई तकनीकी सहायता

बन्नी वन विभाग ने इस कार्यक्रम में वनतारा से तकनीकी मदद मांगी है। इसमें विशेष वाहन, पोर्टेबल बाड़े, पशु चिकित्सकों की सहायता और वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने की तकनीकी मदद शामिल है।

वन विभाग और वनतारा पहले भी वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में साथ काम कर चुके हैं। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की मंजूरी के बाद वनतारा ने बारडा वन्यजीव अभयारण्य में करीब 80 चीतल हिरणों को प्राकृतिक वातावरण में दोबारा बसाने में भी वन विभाग की मदद की है।

बन्नी में काले हिरणों की वापसी वन्यजीव संरक्षण के साथ उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे आने वाले समय में बन्नी क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या और प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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