धनबाद: झारखण्ड की खनिज संपदा और राज्य के संवैधानिक अधिकारों की कथित हकमारी के खिलाफ झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) धनबाद जिला समिति के नेतृत्व में शुक्रवार को रणधीर वर्मा चौक पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केन्द्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का पुतला दहन किया।
झामुमो नेताओं ने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार द्वारा खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के माध्यम से खनिज-संपन्न राज्यों के आर्थिक अधिकारों को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है। झामुमो ने इसे संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए कहा कि झारखण्ड जैसे खनिज उत्पादक राज्य की प्राकृतिक संपदा का लाभ राज्य की जनता को मिलना चाहिए, न कि केन्द्र सरकार की नीतियों के कारण राज्य के अधिकारों और राजस्व को कमजोर किया जाना चाहिए।
झामुमो नेताओं ने कहा कि झारखण्ड दशकों से देश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिज उपलब्ध कराता रहा है। खनन से पर्यावरणीय नुकसान, विस्थापन, प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सबसे बड़ा बोझ झारखण्ड की जनता उठाती है। ऐसे में राज्य को अपनी खनिज संपदा से प्राप्त होने वाले राजस्व का उपयोग जनकल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और सामाजिक सुरक्षा के लिए करने का पूरा अधिकार होना चाहिए।
मथुरा प्रसाद महतो ने कहा—झारखण्ड की संपदा पर पहला अधिकार झारखण्डवासियों का
इस अवसर पर झारखण्ड सरकार के सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक एवं टुण्डी विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री मथुरा प्रसाद महतो ने कहा कि झारखण्ड केवल देश का खनिज भंडार नहीं, बल्कि यहां के आदिवासी-मूलवासी और मेहनतकश लोगों की मातृभूमि है। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा के कारण झारखण्ड को वर्षों से विस्थापन और प्रदूषण का दंश झेलना पड़ा है, इसलिए खनिज से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा झारखण्ड की जनता के कल्याण पर खर्च होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार यदि झारखण्ड के आर्थिक अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास करेगी तो झामुमो सड़क से सदन तक इसका पुरजोर विरोध करेगा। झारखण्ड के अधिकारों की लड़ाई किसी व्यक्ति या पार्टी की लड़ाई नहीं, बल्कि राज्य की जनता के भविष्य की लड़ाई है।
महतो ने कहा कि झारखण्ड की जनता को अपने अधिकारों के लिए एकजुट होना होगा और केन्द्र की ऐसी नीतियों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना होगा, जिनसे राज्य की आर्थिक स्वायत्तता प्रभावित होती है।
लक्खी सोरेन बोले—झारखण्ड की धरती से निकला खनिज, झारखण्ड के भविष्य का आधार
झामुमो धनबाद जिलाध्यक्ष लक्खी सोरेन ने कहा कि धनबाद की धरती देश को ऊर्जा देती है, लेकिन यहां के लोगों को आज भी प्रदूषण, विस्थापन, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की समस्याओं से जूझना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि झारखण्ड की खनिज संपदा पर राज्य का उचित अधिकार सुनिश्चित करना होगा। यदि केन्द्र सरकार राज्य के राजस्व स्रोतों को सीमित करने की कोशिश करती है तो इसका सीधा असर गरीब, किसान, मजदूर, महिला, बुजुर्ग और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ेगा।
सोरेन ने कहा कि झामुमो किसी भी कीमत पर झारखण्ड के जल, जंगल, जमीन और खनिज पर जनता के अधिकार से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि झामुमो की लड़ाई सत्ता के लिए नहीं, बल्कि झारखण्ड के अधिकार, अस्मिता और सम्मान के लिए है।
डॉ. नीलम मिश्रा ने कहा—यह केवल राजस्व का सवाल नहीं, सामाजिक न्याय का सवाल है
झामुमो केन्द्रीय मीडिया पेनालिस्ट डॉ. नीलम मिश्रा ने कहा कि खनिज संपदा से मिलने वाला राजस्व केवल सरकारी खजाने का आंकड़ा नहीं है, बल्कि उससे जुड़ी योजनाओं और करोड़ों लोगों के जीवन का सवाल है।
उन्होंने कहा कि झारखण्ड जैसे राज्य में सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन बेहद महत्वपूर्ण हैं। मंईयां सम्मान योजना, सर्वजन पेंशन योजना, अबुआ आवास योजना सहित गरीब और जरूरतमंदों के लिए संचालित योजनाओं की वित्तीय क्षमता प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि केन्द्र और राज्य के बीच संबंध टकराव का नहीं, बल्कि संवैधानिक संघवाद और सहयोग का होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि खनन का पर्यावरणीय और सामाजिक बोझ राज्य की जनता उठाती है तो खनिज संपदा से होने वाले आर्थिक लाभ में राज्य की हिस्सेदारी कमजोर क्यों की जाए?
उन्होंने कहा कि झारखण्ड के अधिकारों को कमजोर करने वाली किसी भी नीति के खिलाफ झामुमो जनमत तैयार करेगा और लोकतांत्रिक संघर्ष को और तेज करेगा।
मन्नू आलम ने कहा—धनबाद की धरती से उठी आवाज दिल्ली तक जाएगी
झामुमो धनबाद जिला सचिव श्री मन्नू आलम ने कहा कि धनबाद की जनता खनिज और कोयले के महत्व को सबसे बेहतर तरीके से समझती है। उन्होंने कहा कि यहां की धरती से निकलने वाला कोयला देश की अर्थव्यवस्था को गति देता है, लेकिन इसके बदले धनबाद और झारखण्ड को प्रदूषण, भू-धंसान, विस्थापन और स्वास्थ्य संकट की भारी कीमत चुकानी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि यदि केन्द्र सरकार राज्य के राजस्व अधिकारों को सीमित करने का प्रयास करती है तो झामुमो चुप नहीं बैठेगा। रणधीर वर्मा चौक से उठी यह आवाज पूरे झारखण्ड में पहुंचेगी और जरूरत पड़ी तो राज्यव्यापी आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
श्री आलम ने कहा कि झामुमो कार्यकर्ता गांव-गांव और पंचायत-पंचायत जाकर जनता को केन्द्र सरकार की नीतियों की वास्तविकता बताएंगे तथा झारखण्ड के संवैधानिक और आर्थिक अधिकारों के लिए जनसमर्थन जुटाएंगे।
झामुमो की दो टूक चेतावनी
झामुमो धनबाद जिला समिति ने केन्द्र सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि झारखण्ड की प्राकृतिक संपदा का दोहन करके राज्य के अधिकारों को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पार्टी ने मांग की कि केन्द्र सरकार खनिज-संपन्न राज्यों के राजस्व और संवैधानिक अधिकारों को सुरक्षित रखने की दिशा में कदम उठाए तथा झारखण्ड की खनिज संपदा से राज्य और यहां की जनता को न्यायपूर्ण हिस्सेदारी सुनिश्चित करे।
नेताओं ने कहा कि झारखण्ड की धरती से निकलने वाला हर टन कोयला और हर टन खनिज केवल देश की अर्थव्यवस्था की ताकत नहीं, बल्कि झारखण्ड की जनता के अधिकार और भविष्य से भी जुड़ा है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में झामुमो के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं समर्थक उपस्थित रहे। प्रदर्शन के दौरान केन्द्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया गया।
झामुमो धनबाद जिला समिति ने स्पष्ट किया कि झारखण्ड के जल, जंगल, जमीन और खनिज पर जनता के अधिकार की यह लड़ाई आगे भी पूरी मजबूती और आक्रामक लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगी।

