संसद ने मंगलवार, 11 अगस्त को ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी। राज्यसभा में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के जवाब के बाद बिल को ध्वनिमत से पास किया गया। इससे पहले यह विधेयक लोकसभा में भी पारित हो चुका था।
ट्रिब्यूनल में नियुक्तियों के लिए बनेगा आयोग
इस विधेयक में अलग-अलग ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए एक आयोग बनाने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और एकरूपता आएगी।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह विधेयक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य ट्रिब्यूनलों के अधिकार क्षेत्र में बदलाव करना नहीं है।
क्या है बिल का मकसद?
सरकार के अनुसार, विधेयक का मुख्य उद्देश्य ट्रिब्यूनल में नियुक्तियों की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और बेहतर बनाना है। इसके साथ ही अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए योग्यता और पात्रता के नियमों में भी एकरूपता लाने की कोशिश की गई है।
विधेयक पर चर्चा के दौरान कई सांसदों ने कहा कि इससे देश के ट्रिब्यूनल सिस्टम को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम करने में भी ट्रिब्यूनल की भूमिका बेहतर हो सकती है।
आयोग में होंगे 5 सदस्य
प्रस्तावित आयोग में कुल 5 सदस्य होंगे। इसमें एक अध्यक्ष और चार सदस्य शामिल होंगे। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से ट्रिब्यूनलों में नियुक्तियों की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी होगी।
प्रस्तावित आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा और इसमें एक अध्यक्ष तथा चार सदस्य होंगे. इनमें दो न्यायिक और दो तकनीकी सदस्य होंगे. सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश इस प्रस्तावित आयोग के अध्यक्ष पद के लिए पात्र होंगे.
बिल के ड्राफ्ट के अनुसार उच्चतम न्यायालय ने हाल में ‘न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021’ के कुछ प्रावधानों को इस आधार पर निरस्त कर दिया था कि वे शक्तियों के पृथक्करण और न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों के खिलाफ हैं.

