अपने साथियों और सरकारी मशीनरी को बचाते हुए जान गंवाने वाले शौर्य चक्र विजेता मोहन सिंह की पत्नी कुलदीप कौर को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उन्हें ₹10 लाख की अतिरिक्त राशि देने का आदेश दिया है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया।
साथियों को बचाते हुए शहीद हुए थे मोहन सिंह
मोहन सिंह बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) में इंजीनियर थे। 10 जुलाई 2000 को अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के पास एक महत्वपूर्ण सड़क के निर्माण के दौरान यह हादसा हुआ।
हेलीआंग-मेटांगलियांग-चाग्लोहागोम सड़क निर्माण के दौरान पहाड़ी से अचानक पत्थर और मलबा गिरने लगा। मोहन सिंह ने पहले अपने साथ काम कर रहे ऑपरेटरों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और सरकारी मशीनों को बचाने की कोशिश की।
इसी दौरान वह करीब 70 मीटर गहरी घाटी में गिर गए और मलबे में दब गए, जिससे उनकी मौत हो गई।
मरणोपरांत मिला शौर्य चक्र
मोहन सिंह के इस साहस और बलिदान को देखते हुए उन्हें 19 अक्टूबर 2001 को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने उनकी पत्नी को अतिरिक्त आर्थिक सहायता देते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और सेवा में अपना जीवन कुर्बान करने वाले वीरों के परिवारों को उनका हक पाने के लिए अनावश्यक परेशानी नहीं उठानी चाहिए।
परिवार को सिर्फ पेंशन मिल रही थी
शुरुआत में उनके परिवार को सिर्फ सामान्य पेंशन दी जा रही थी. CCS (Extraordinary Pension) Rules, 1939 के तहत विशेष असाधारण पेंशन की मांग को यह कहकर खारिज कर दिया गया था कि उन्हें Workmen’s Compensation Act के तहत 1,84,170 रुपए दिए जा चुके हैं. पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने मामले में दखल देते हुए इसे Category-C के तहत असाधारण पेंशन का मामला माना.
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने असाधारण पेंशन के आदेश को बनाए रखा, लेकिन बकाया भुगतान को याचिका दायर करने के पहले तीन साल तक सीमित कर दिया. अब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के वी विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की बेंच ने तीन साल की सीमा को हटा दिया है.
शहीद की पत्नी को 14.28 लाख रुपए दिए गए
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिक की विधवा के मामले में कानूनी देरी को आधार बनाकर राहत से वंचित नहीं किया जा सकता. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि हाई कोर्ट के आदेश के तहत शहीद की पत्नी को 14.28 लाख रुपए दिए गए हैं. असाधारण पेंशन का बकाया ब्याज सहित 8.32 लाख रुपए बनता है. उसका भी भुगतान किया जाएगा.
10 लाख की अतिरिक्त सहायता का SC ने दिया आदेश
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 10 लाख रुपए की अतिरिक्त राहत देने का आदेश दिया. जजों ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान देने वाले वीरों के परिवारों को हक पाने के लिए अदालतों के चक्कर लगाने की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए.

