लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस एक्सप्रेसवे पर फिलहाल टोल वसूली रोक दी है। यह फैसला एक्सप्रेसवे के शुरू होने के कुछ समय बाद कई जगहों पर सड़क धंसने और गड्ढे होने की शिकायतों के बाद लिया गया है।
अब जब तक सड़क की खराब जगहों की मरम्मत नहीं हो जाती, यात्रियों से टोल नहीं लिया जाएगा। हालांकि, टोल बंद होने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि इससे सरकार को बड़ी रकम का नुकसान होगा या नहीं।
सड़क खराब होने के बाद लिया गया फैसला
बताया जा रहा है कि भारी बारिश के बाद एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में सड़क धंस गई और कई जगह गड्ढे बन गए। इसके बाद एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता और पानी की निकासी की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे।
इन समस्याओं को देखते हुए NHAI ने टोल वसूली रोकने का फैसला किया है। खराब हिस्सों की मरम्मत और सड़क को जरूरी मानकों के मुताबिक ठीक किए जाने तक यात्रियों से कोई टोल नहीं लिया जाएगा।
इसका मकसद यात्रियों को राहत देने के साथ-साथ निर्माण से जुड़ी कमियों के लिए जिम्मेदार ठेकेदार पर जवाबदेही तय करना भी है।
क्या सरकार को होगा टोल का नुकसान?
टोल वसूली बंद होने का मतलब यह नहीं है कि सरकार या NHAI को पूरे टोल रेवेन्यू का नुकसान खुद उठाना पड़ेगा। NHAI की व्यवस्था के तहत इस अवधि में संभावित टोल कलेक्शन की भरपाई की जिम्मेदारी प्रोजेक्ट से जुड़े ठेकेदार पर डाली जा सकती है।
यानी फिलहाल यात्रियों को कार, जीप और वैन के लिए ₹275 के एक तरफ के टोल से राहत मिलेगी। वहीं, टोल बंद रहने से होने वाला आर्थिक बोझ प्रोजेक्ट के जिम्मेदार कॉन्ट्रैक्टर पर पड़ेगा।
मरम्मत का खर्च कौन उठाएगा?
आर्थिक जिम्मेदारी सिर्फ खोए हुए टोल रेवेन्यू की भरपाई तक ही सीमित नहीं है. एक्सप्रेसवे के खराब हिस्सों की मरम्मत का अनुमानित खर्च लगभग 3 करोड़ रुपये है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह सिर्फ दिख रहे गढ्ढों को भरने के बजाय ठीक से दोबारा निर्माण और मजबूत कम करें. उम्मीद है कि खराब हुई तटबंधों और बेस लेयर्स की मरम्मत की जाएगी ताकि अंदरूनी बनावट से जुड़ी समस्या को ठीक किया जा सके.
एक्सप्रेसवे को बनाने में कितना खर्चा आया?
6 लेन वाले लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को लगभग ₹4200 करोड़ से ₹4700 करोड़ की लागत से बनाया गया था. इसका उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को हुआ था लेकिन कुछ ही हफ्तों के अंदर चिंता तब पैदा हुई जब सड़क के कुछ हिस्सों में धंसने के लक्षण दिखाई देने लगे. उद्घाटन और संरचनात्मक समस्याओं के सामने आने के बीच कम समय में निर्माण की गुणवत्ता, जल निकासी डिजाइन और मिट्टी के जमाव पर सवाल खड़े कर दिए.
सड़क क्यों धंसी?
शुरुआती जांच में इंजीनियरिंग और निर्माण से जुड़ी संभावित समस्याओं की तरफ इशारा किया गया है. भारी बारिश ने प्रभावित हिस्सों की कमजोरी को दर्शाया है. साथ ही खराब जल निकासी योजना और मिट्टी का ठीक से ना जमाना इसकी संभावित वजह बताई गई हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रभावित इलाके में एक रिटेनिंग वॉल भी ढह गई. हालांकि सटीक तकनीकी वजह का पता विशेषज्ञों की जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा.
जब खामियों की जानकारी मिली उसके बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कई कदम उठाए. टोल वसूली रोकने और निर्माण कंपनी को नोटिस जारी करने के अलावा काम से जुड़े प्रोजेक्ट मैनेजर को भी हटा दिया गया है.
जिम्मेदार पाए गए इंजीनियरों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है. इसमें उन्हें 2 साल तक नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया प्रोजेक्ट पर काम करने से रोकने का प्रस्ताव भी शामिल है. इसका मकसद जवाबदेही को तय करना और बड़े हाईवे प्रोजेक्ट में लापरवाही को रोकना है.

