राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत 6 अगस्त को मुंबई में देश के युवाओं से बातचीत करेंगे। वह IIMUN (इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस) की 15वीं वर्षगांठ और वार्षिक चैंपियनशिप सम्मेलन के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होंगे।
इस सम्मेलन में देश के 100 से अधिक शहरों से आए 15 से 19 साल के 2,000 से ज्यादा छात्र-छात्राएं हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नेतृत्व, संवाद और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है।
क्या है IIMUN?
IIMUN युवाओं द्वारा चलाया जाने वाला एक संगठन है, जिसकी शुरुआत 2011 में हुई थी। यह भारत के 275 शहरों और 40 से अधिक देशों में सक्रिय है। संगठन के मुताबिक, अब तक 7.5 करोड़ से ज्यादा युवा और 1.5 लाख से अधिक स्कूल-कॉलेज इससे जुड़ चुके हैं।
Gen-Z पर बढ़ी चर्चा
हाल के दिनों में Gen-Z को लेकर देशभर में चर्चा तेज हुई है। दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के बाद विपक्ष ने इसे Gen-Z आंदोलन बताया था। विपक्ष का दावा है कि युवाओं के दबाव के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हाल के दिनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए कई बार Gen-Z से सीधे संवाद कर चुके हैं।
मनुष्य अपने अनुभवों से लगातार सीखता रहता है
इससे पहले मोहन भागवत ने भारतीय संस्कृति और समाज में बदलते मूल्यों को लेकर कहा कि समय के साथ बदलना भी मातृत्व का एक महत्वपूर्ण पहलू है. जीवन में परिवर्तन स्वाभाविक प्रक्रिया है और मनुष्य अपने अनुभवों से लगातार सीखता रहता है.
अनुभव ही सबसे बड़ा शिक्षक बनता है
सीखने के कई माध्यम होते हैं. यदि मार्गदर्शन उपलब्ध हो तो व्यक्ति सहज रूप से आगे बढ़ता है, लेकिन कई बार अनुभव ही सबसे बड़ा शिक्षक बनता है. हालांकि अनुभव से मिलने वाली शिक्षा कठिन होती है, फिर भी वह जीवनभर साथ रहती है.
उन्होंने कहा था, ‘मां का स्नेह और भावनात्मक सहयोग केवल बचपन तक सीमित नहीं होता. जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, वह कई बार मां की बातों का विरोध भी करता है, लेकिन इसके बावजूद मां का रिश्ता सबसे अलग और स्थायी रहता है.
जीवन के हर चरण में व्यक्ति को भावनात्मक सहारे की आवश्यकता होती है और मां वह स्थान होती है, जहां व्यक्ति बिना किसी संकोच के अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकता है.’

