Sawan First Somwari 2026: सिंदरी के शिव मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, भोलेनाथ के जयकारों से गूंजा माहौल

Sawan First Somwari 2026: सिंदरी के शिव मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, भोलेनाथ के जयकारों से गूंजा माहौल

धनबाद/सिंदरी: सावन माह के पहले सोमवारी के अवसर पर सिंदरी और आसपास के विभिन्न शिव मंदिरों एवं शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही शिवभक्त भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में पहुंचने लगे। पूरे दिन मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।

सुबह से मंदिरों में लगी रही श्रद्धालुओं की कतार

सावन के पहले सोमवार पर महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बच्चों ने बड़ी संख्या में शिव मंदिरों में पहुंचकर भगवान शिव का अभिषेक किया। श्रद्धालुओं ने गंगाजल, दूध, बेलपत्र, फूल और फल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की।

सिंदरी के शहरपुरा शिव मंदिर, रांगामाटी, आरएमके फोर, अमर शक्ति क्लब रोडाबांध, मनोहरटांड़, गौशाला, डोमगढ़ और एसीसी क्षेत्र के शिवालयों में दिनभर भक्तों की आवाजाही बनी रही।

शहरपुरा शिव मंदिर में उमड़ी सबसे अधिक भीड़

शहरपुरा शिव मंदिर के सचिव सह पूर्व पार्षद दिनेश सिंह ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सिंदरीवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। उन्होंने बताया कि मंदिर में स्थापित नर्मदेश्वर शिवलिंग के दर्शन और पूजा के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी अन्य वर्षों की तरह बड़ी संख्या में श्रद्धालु कतारबद्ध होकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं। उन्होंने भगवान भोलेनाथ से सभी पर अपनी कृपा बनाए रखने की कामना की।

फूल, बेलपत्र और गंगाजल से हुआ जलाभिषेक

श्रद्धालुओं ने भगवान शिव को गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, फूल और फल अर्पित कर विशेष पूजा की। कई मंदिरों में रुद्राभिषेक, शिव आरती और भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया गया। पूरे दिन मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठानों और भक्ति संगीत से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

सावन का पहला सोमवार आस्था का बना केंद्र

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। पहले सोमवारी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर भोलेनाथ का पूजन किया और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की। मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्थानीय स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई थीं।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *