असम बाढ़: मदद के लिए आगे आए लोग, 400 किमी दूर से पहुंचे हेमंत कलिता

असम बाढ़: मदद के लिए आगे आए लोग, 400 किमी दूर से पहुंचे हेमंत कलिता

असम के शिवसागर और चराइदेव जिले भीषण बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। ऐसे समय में कई लोग और सामाजिक संगठन बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं हेमंत कलिता, जो करीब 400 किलोमीटर दूर सुवालकुची से अपने साथियों के साथ शिवसागर पहुंचे हैं। वे बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री बांट रहे हैं और जरूरतमंद लोगों की मदद कर रहे हैं।

प्लास्टिक कचरे को लेकर जताई चिंता

हेमंत कलिता ने कहा कि राहत सामग्री ज्यादातर प्लास्टिक के पैकेटों में दी जा रही है। अगर इन प्लास्टिक कचरों का सही तरीके से निपटान नहीं किया गया, तो भविष्य में पर्यावरण को नुकसान हो सकता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि राहत कार्य खत्म होने के बाद प्लास्टिक कचरे को इकट्ठा कर उसका सही तरीके से निपटान कराया जाए।

पुनर्वास में भी जुटे संगठन

बाढ़ से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए कई संगठन भी काम कर रहे हैं। नागालैंड के नागिनीजान स्थित गोरखा यूनियन के सदस्य नेपाली खूटी गांव में बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए बांस के छोटे-छोटे घर बना रहे हैं। यह गांव बाढ़ में पूरी तरह तबाह हो गया था और यहां के कई घर पानी में बह गए थे।

इधर, लगभग 250 किलोमीटर दूर तेजपुर से सशस्त्र सीमा बल (SSB) के कंपोजिट अस्पताल की एक टीम भी शिवसागर पहुंची. ‘मानवतार स्वार्थत आमी’ नामक गैर-सरकारी संगठन के माध्यम से टीम ने जिले के दूर-दराज और पिछड़े इलाकों में रहने वाले बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच आवश्यक राहत सामग्री वितरित की. वहीं, लगभग 200 किलोमीटर दूर जगुन से लालपहाड़ सेमा स्टूडेंट्स यूनियन के सदस्य भी शिवसागर पहुंचे और राहत सामग्री लेकर बाढ़ पीड़ितों की सहायता की.

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मदद कर रहे मशहूर हस्तियां

लालपहाड़ सेमा स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष ने कहा, ‘हम शिवसागर के बाढ़ प्रभावित लोगों के साथ खड़े होने के लिए यहां आए हैं. हम आवश्यक राहत सामग्री लेकर आए हैं और इसे दिखौमुख कॉलेज के प्राचार्य को सौंपा है, ताकि वे इसे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचा सकें.’

जहां एक ओर कई मशहूर हस्तियों और चर्चित लोगों की राहत यात्राओं ने सुर्खियां बटोरीं, वहीं दूसरी ओर ये गुमनाम नायक बिना किसी पहचान या प्रचार की इच्छा के लगातार लोगों की सेवा में लगे हुए हैं. राहत सामग्री पहुंचाने से लेकर बेघर परिवारों के लिए आश्रय बनाने तक, उनके निस्वार्थ प्रयास इस आपदा के बीच इंसानियत की सबसे खूबसूरत मिसाल पेश कर रहे हैं. 

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