स्पेन-मोरक्को सीमा पर बड़ा हादसा, समुद्र के रास्ते घुसने की कोशिश में 34 प्रवासियों की मौत

स्पेन-मोरक्को सीमा पर बड़ा हादसा, समुद्र के रास्ते घुसने की कोशिश में 34 प्रवासियों की मौत

स्पेन और मोरक्को की सीमा से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। स्पेन के उत्तरी अफ्रीका स्थित सेउटा (Ceuta) शहर में प्रवेश करने के लिए हजारों अवैध प्रवासियों ने समुद्र में छलांग लगा दी और तैरकर सीमा पार करने की कोशिश की।

इस दौरान मची अफरा-तफरी और समुद्र में डूबने की घटनाओं में 34 लोगों की मौत हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बड़ी संख्या में लोग समुद्र में तैरते और सीमा पार करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं।

कैसे बिगड़े हालात?

रिपोर्ट्स के अनुसार, हजारों लोग एक साथ सेउटा की ओर बढ़ने लगे। भीड़ को रोकने के लिए मोरक्को की सुरक्षा एजेंसियों ने आंसू गैस, वाटर कैनन और हवाई फायरिंग का सहारा लिया। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग सीमा की ओर बढ़ते रहे।

कितने लोग पहुंचे सेउटा?

सेउटा प्रशासन के मुताबिक, इस घटना के दौरान करीब 60,000 लोग शहर में प्रवेश कर गए। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से स्थानीय प्रशासन पर भारी दबाव पड़ गया।

स्थिति को नियंत्रित करने और राहत कार्यों में मदद के लिए स्पेन सरकार ने अतिरिक्त सैन्य बल भी तैनात कर दिए हैं। फिलहाल प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।

आखिर मोरक्को के लोग अपना देश छोड़ने को क्यों मजबूर हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, सीमा पार करने की कोशिश करने वालों में बड़ी संख्या मोरक्को के युवा नागरिकों की थी। लंबे समय से बनी हुई बेरोजगारी और बेहतर भविष्य की तलाश उन्हें यूरोप की ओर खींच रही है। हालांकि, इस संकट की वजह सिर्फ आर्थिक तंगी नहीं है। हाल ही में स्पेन के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि समुद्र में पकड़े गए प्रवासियों को तत्काल मोरक्को वापस नहीं भेजा जा सकता। उन्हें पहले स्पेन लाकर कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस फैसले का फायदा मानव तस्करी से जुड़े गिरोहों ने उठाया। उन्होंने मोरक्को में यह अफवाह फैलाई कि अब समुद्र के रास्ते स्पेन पहुंचना पहले की तुलना में आसान हो गया है। इसी भ्रम में हजारों लोग सीमा की ओर निकल पड़े। तस्करों ने लोगों को यह भी विश्वास दिलाया कि एक बार स्पेन पहुंचने के बाद कानूनी प्रक्रिया लंबी चलेगी और इस दौरान वे यूरोप के अन्य देशों तक पहुंच सकते हैं।

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने शुक्रवार को सेउटा का दौरा किया। उन्होंने इस सामूहिक घुसपैठ को ‘स्पेन की क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन’ बताया। उन्होंने इसके लिए मानव तस्करी करने वाले गिरोहों को जिम्मेदार ठहराया। सांचेज के मुताबिक, तस्करों ने स्पेन के सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले को गलत तरीके से पेश करते हुए प्रवासियों के बीच यह भ्रम फैला दिया कि यदि वे तैरकर स्पेन की सीमा में पहुंच गए तो उन्हें तुरंत वापस नहीं भेजा जा सकेगा।

कितना गंभीर हो चुका है संकट?
स्थानीय सिविल गार्ड के प्रतिनिधियों के अनुसार, बड़ी संख्या में प्रवासी, जिनमें कई बिना अभिभावक वाले बच्चे भी शामिल हैं, पार्कों और फुटपाथों पर रात बिताने को मजबूर हैं। राहत और बचाव एजेंसियां लगातार बढ़ती भीड़ के कारण भारी दबाव में हैं। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों में कई लोग समुद्र में डूब गए, जबकि कुछ लोगों की मौत तराजाल बीच के ब्रेकवॉटर के पास मची भगदड़ में हुई।

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, मोरक्को के सुरक्षा बलों ने पकड़े गए प्रवासियों को सीमा क्षेत्र से दूर अन्य स्थानों पर पहुंचाया, लेकिन इसके बावजूद नए समूह लगातार सीमा तक पहुंचते रहे। वहीं कुछ ऐसे प्रवासी, जो किसी तरह सेउटा पहुंच गए थे, बाद में स्वेच्छा से वापस मोरक्को लौट गए।

क्या इस संकट का असर पूरे यूरोप पर पड़ रहा है?
इस घटनाक्रम ने पूरे यूरोप में राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं। इटली ने स्पेन के साथ अपनी सीमा निगरानी और कड़ी करने की चेतावनी दी है, जबकि फ्रांस ने भी अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में जांच बढ़ाने का ऐलान किया है। दूसरी ओर, स्पेन के विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री सांचेज़ की सरकार पर अवैध प्रवासन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, जिसे सरकार ने खारिज करते हुए कहा कि इस संकट की असली वजह मानव तस्करों द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर फैलाई गई गलत जानकारी है, न कि सरकार की आव्रजन नीति।

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