रांची/गिरिडीह: झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा की संयुक्त कार्रवाई में ₹1 करोड़ के इनामी शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को राज्य में नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस कार्रवाई से माओवादी संगठन के नेतृत्व और नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। हालांकि, नक्सलवाद के पूरी तरह समाप्त होने संबंधी किसी भी दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
छात्र जीवन में वामपंथी विचारधारा से जुड़ा
जानकारी के अनुसार, मिसिर बेसरा छात्र जीवन के दौरान ही तत्कालीन माओवादी संगठन एमसीसी (MCC) के वरिष्ठ नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा से प्रभावित हुआ। इसके बाद उसने संगठन की बैठकों में भाग लेना शुरू किया और धीरे-धीरे सक्रिय भूमिका निभाने लगा।
1985 से शुरू हुआ संगठन में सफर
वर्ष 1985 में धनबाद के सिंदरी में आयोजित ऑल इंडिया लीग फॉर रिवोल्यूशनरी कल्चर के दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन में उसने स्वयंसेवक (वॉलिंटियर) के रूप में काम किया। इसके बाद वर्ष 1986 में एमसीसी नेता सोवन मरांडी ने उसे संगठन की प्राथमिक सदस्यता दिलाई।
संगठन में लगातार बढ़ती गई जिम्मेदारी
वर्ष 1990 में किशन दा ने उसे संगठन के प्रेस कार्य और कोलकाता में संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी। उस समय वह सब-जोनल स्तर का सदस्य था।
1992 में कोलकाता से लौटने के बाद उसने राजेश नामक साथी के साथ रांची और आसपास के जिलों में संगठन के विस्तार का कार्य किया।
1997 में उसने दक्षिणी छोटानागपुर कमिटी के गठन में भूमिका निभाई, जबकि 2000 में झारखंड रीजनल कमिटी के गठन में भी सक्रिय योगदान दिया। इसी वर्ष उसने बुंडू क्षेत्र में संगठन का पहला सशस्त्र दस्ता गठित कराया।
केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा
वर्ष 2003 में मिसिर बेसरा को संगठन की केंद्रीय कमेटी का सदस्य बनाया गया। इसके बाद सितंबर 2004 में विभिन्न उग्रवादी संगठनों के विलय के बाद उसे सेंट्रल मिलिट्री कमीशन और ईआरबी (ERB) के सैन्य कमांड का प्रमुख बनाया गया।
इसके बाद वह संगठन की रणनीति, सैन्य गतिविधियों, कैडर संचालन और विभिन्न जोनों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा।
गिरफ्तारी के बाद एजेंसियों की पूछताछ जारी
सुरक्षा एजेंसियां मिसिर बेसरा के साथ गिरफ्तार अन्य माओवादी सदस्यों मेहनत उर्फ मोछू और गौरव से भी पूछताछ कर रही हैं। जांच में संगठन के नेटवर्क, फरार कैडरों और अन्य गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।
यह गिरफ्तारी झारखंड में लंबे समय से चल रहे नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। हालांकि, राज्य में नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त होने संबंधी किसी निष्कर्ष के लिए आधिकारिक जानकारी और आगे की सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

