HDFC बैंक ने अपने मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO शशिधर जगदीशन, चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) श्रीनिवासन वैद्यनाथन और ग्रुप हेड (रिटेल एसेट्स) अरविंद वोहरा पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही तीनों अधिकारियों को चेतावनी पत्र भी जारी किया गया है।
बैंक ने यह कार्रवाई 2017 और 2021 में महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) से डिपॉजिट जुटाने के लिए किए गए समझौतों की आंतरिक समीक्षा (Internal Review) के बाद की है। राजीव कुमार के नए पार्ट-टाइम चेयरमैन बनने के बाद HDFC बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का यह पहला बड़ा फैसला माना जा रहा है।
स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी
स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में HDFC बैंक ने बताया कि 23 जुलाई 2026 को हुई बोर्ड बैठक में इस मामले पर चर्चा की गई। बोर्ड ने स्वतंत्र निदेशकों की स्पेशल डिसिप्लिनरी कमेटी की रिपोर्ट और सिफारिशों की समीक्षा के बाद फैसला लिया।
बैंक के अनुसार, जांच में यह पाया गया कि संबंधित अधिकारियों का उद्देश्य निजी फायदा उठाना या कोई गलत काम करना नहीं था। उन्होंने केवल कारोबार बढ़ाने की कोशिश में तय सीमा से आगे कदम उठाए थे।
इसके बावजूद, RBI के नियमों का पूरा पालन सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड ने MD और CEO शशिधर जगदीशन, CFO श्रीनिवासन वैद्यनाथन और ग्रुप हेड (रिटेल एसेट्स) अरविंद वोहरा पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाने और उन्हें चेतावनी पत्र जारी करने का फैसला किया। मामले से जुड़े अन्य कर्मचारियों को भी चेतावनी पत्र दिए गए हैं। बोर्ड ने यह भी निर्देश दिया है कि इस पूरे मामले की जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भेजी जाए।
बता दें कि यह मामला एक जांच रिपोर्ट से जुड़ा है। इसमें आरोप लगाया गया था कि HDFC बैंक ने राज्य एजेंसी से बड़े डिपॉजिट हासिल करने के लिए महाराष्ट्र के सड़क विकास निगम को पेमेंट किया था। रिपोर्ट के अनुसार, इन पेमेंट को मार्केटिंग खर्च के तौर पर दिखाया गया था ताकि ऐसा लगे कि यह पैसा विभाग को बैंक में फंड रखने के लिए प्रोत्साहित करने पर खर्च किया जा रहा है। न कि उस मकसद के लिए जिसके लिए असल में यह किया गया था। हालांकि, बैंक ने उस समय गलत काम के आरोपों का पुरजोर खंडन किया था।
बैंक ने 27 मई को एक बयान में कहा था, ‘बैंक के पास मजबूत इंटरनल निगरानी, ऑडिट और कंट्रोल प्रोसेस और सिस्टम हैं। सभी मामलों को बैंक के तय नियमों के अनुसार निपटाया जाता है। किसी भी इंटरनल समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लेने से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। हम चुनिंदा जानकारी के आधार पर गलत काम या दोषी होने की किसी भी धारणा को पूरी तरह से खारिज करते हैं।’

