केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन सोमवार को और तेज हो गया। प्रदर्शनकारी संसद भवन की ओर मार्च कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया।
यह प्रदर्शन ऐसे समय हो रहा है, जब संसद का मानसून सत्र जारी है। प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार की आलोचना की है।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में कई समस्याएं हैं और सरकार को इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हम लगातार कह रहे हैं कि शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं है। बच्चों पर आंसू गैस क्यों छोड़ी जा रही है और उनकी पिटाई क्यों की जा रही है? वे हमारे ही बच्चे हैं।” इस मामले को लेकर संसद के अंदर और बाहर राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
प्रधानमंत्री के बयान पर राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ‘पीएम मोदी का यही काम है दूसरों को कुछ कहना. पहले आप अपनी प्रमाणिकता लोगों को दिखाएं. तुम्हारी 56 इंच की छाती किधर गई? तूम दूसरों की आलोचना करते हो, आपने देश के लिए क्या किया? मैं ये पूछता हूं. अपने भक्तों को ट्रस्ट बनाकर चोरी करने के लिए कहा. आपके भक्त चोरी कर रहे हैं. आपने ही लोगों का नामांकन किया, आपके ही लोग उसमें हैं. उसी के साथ-साथ NEET से लाखों विद्यार्थी परेशान हैं…अपनी कमजोरियां छिपाने के लिए वे बोलते हैं. कोई प्रधानमंत्री ऐसा नहीं करता है. हर प्रधानमंत्री समस्या को सुलझाने की बात करता है. मैं ऐसे बयान की निंदा करता हूं.’
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, ‘यह सरकार लोगों के मुद्दों को लेकर बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं है. आप NEET और CBSE परीक्षा के पेपर लीक होने से देश के परिवारों का दर्द देख सकते हैं. माता-पिता छात्रों यानी अपने बेटे-बेटियों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं. हमारी यह मांग है कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें और NEET, CBSE परीक्षाओं पर चर्चा हो कि परीक्षा प्रणाली को कैसे बेहतर बनाया जाए, पेपर लीक को कैसे रोका जाए और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता कैसे बनाए रखी जाए. इस पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए और कार्रवाई भी होनी चाहिए. सरकार चर्चा के लिए तैयार नहीं है. स्पीकर हमें इस मुद्दे पर बोलने नहीं दे रहे हैं.’
सपा चीफ अखिलेश यादव ने कहा, ‘हमारे सांसदों को पुलिस स्टेशन में रखा गया है, जबकि बाहर बच्चों को पीटा जा रहा है. यह कैसी सरकार है? आप बच्चों की बात नहीं सुनना चाहते. अगर NEET परीक्षा हुई और उसमें गड़बड़ी हुई, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? आप ‘विश्वगुरु’ बनना चाहते हैं, आप दावा करते हैं कि दुनिया ‘अमृत काल’ में है, फिर भी आप अपने मंत्रियों को नहीं हटा सकते. आपने नौकरियां या रोजगार नहीं दिया. अगर नौकरियां दी गई होतीं तो क्या बच्चे सड़कों पर उतरते? अभी मुख्य सवाल यह है कि NEET छात्रों को न्याय मिलना चाहिए और यहां विरोध कर रहे छात्रों के साथ अच्छा व्यवहार किया जाना चाहिए. जब लोग विरोध प्रदर्शन करते थे, तो अंग्रेज़ उनकी बात सुनते थे. इसीलिए आज पूरी दुनिया में गांधी का सम्मान किया जाता है. उन्होंने विरोध का रास्ता दिखाया. जिस तरह से वे प्रदर्शनकारियों को हटा रहे हैं – उम्मीद है कि सरकार को अंत में ‘सम्मानजनक विदाई’ न मिल जाए.’
मोदी जी का अहंकार कतई बर्दाश्त नहीं
दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘जंतर-मंतर पर देश का सारा युवा लाखों की संख्या में जमा हो गया है. सरकार उनकी बात सुनने की बजाय उनपे लाठी चार्ज करवा रही है. ये ठीक नहीं है. मैं सरकार से appeal करता हूं कि ये हमारे ही देश के बच्चे हैं जो न्याय मांगने सड़कों पर उतरे हैं. अहंकार छोड़िये और इनकी बात सुनिए. हमारे बच्चों पर लाठी चार्ज कर रहे हैं, आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं. ऐसा लगता है कि मोदी जी ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा व्यवस्था ठीक करने की बजाय देश के युवाओं पर सीधे हमला बोल दिया है. युवा मोदी जी का अहंकार कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे.’

