पाकिस्तान इस समय एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है। देश में 100 से अधिक जरूरी दवाओं की भारी कमी हो गई है, जिससे कैंसर, दिल की बीमारी और कई गंभीर रोगों के मरीजों को इलाज में परेशानी हो रही है।
पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, दवाओं की नई कीमतों को मंजूरी मिलने में देरी होने के कारण कई दवा कंपनियों ने उनका उत्पादन रोक दिया। इसी वजह से बाजार में कई जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं।
रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि पाकिस्तान के ड्रग रेगुलेटर अथॉरिटी ने दो साल से भी पहले हार्डशिप कैटेगरी के तहत 105 दवाओं की बदली हुई कीमतों की सिफारिश की थी. ऐसे में प्रोडक्शन की बढ़ती लागत के चलते इन्हें रोक दिया गया था.
डॉन की मानें तो DRAP ने कहा है कि इम्पोर्ट किए कच्चे माल, बिजली, ईंधन, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन, लेबर, फाइनेंसिंग की लागत और पाकिस्तानी रुपये की कीमतों में गिरावट की वजह से मैन्युफैक्चरिंग का खर्च तेजी से बढ़ा है. वहीं, फार्मास्युटिकल कंपनियों का कहना है कि मौजूदा प्राइसिंग पॉलिसी के तहत अब प्रोडक्शन की लागत वसूल नहीं हो पा रही है. इससे प्रोडक्शन में कमी की गई है.
केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन ने नकली दवाओ को लेकर दी चेतावनी
वहीं, इधर, पाकिस्तान के केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के अब्दुल समद बुड्डानी ने चेतावनी दी है कि असली दवाओं की लगातार कमी से बाजार में नकली और घटिया क्वालिटी के प्रोडक्ट्स के लिए जगह बन रही है.
अब इन हालातों के बीच पाकिस्तान के हेल्थ केयर सिस्टम पर प्रेशर बन रहा है. द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में कराची के अब्बासी शहीद अस्पताल के हाउस ऑफिसर्स ने बकाया स्टाइपेंड, अपर्याप्त सुरक्षा और दवाओं की कमी को लेकर अपना विरोध तेज कर दिया था. उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) की सेवाएं बंद कर देंगे.

