झरिया। झरिया-जीतपुर-जामाडोबा मुख्य मार्ग पर एक बार फिर भू-धंसान की घटना सामने आने से सड़क निर्माण की गुणवत्ता और कोयलांचल क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। रविवार शाम करीब छह बजे सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि घटना के समय कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
यह सड़क झरिया, जीतपुर और जामाडोबा को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है, जिससे प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। इसी रास्ते से डिनोबिली, कार्मेल, डीएवी सहित कई सरकारी और निजी विद्यालयों के छात्र-छात्राएं भी आवागमन करते हैं। सड़क धंसने के कारण आम लोगों, विद्यार्थियों और स्थानीय व्यवसायियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पहले भी कई बार हो चुका है भू-धंसान
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब इस स्थान पर सड़क धंसी हो। इससे पहले भी इसी इलाके में तीन से चार बार भू-धंसान की घटनाएं हो चुकी हैं। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह सड़क एक वर्ष भी नहीं टिक सकी, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
विधायक रागिनी सिंह ने किया निरीक्षण
घटना की सूचना मिलने के बाद झरिया विधायक रागिनी सिंह मौके पर पहुंचीं और जिला प्रशासन, टाटा स्टील यूआईएसएल तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने सड़क के नीचे बने खाली हिस्से (गॉफ) का जायजा लिया और अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित स्थल पर लगभग 10 फीट तक बालू भरकर गॉफ भराई का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। इसके बाद तकनीकी मानकों के अनुरूप सड़क की मरम्मत की जाएगी।
उपायुक्त से की बात, जांच और कार्रवाई की मांग
मौके से ही विधायक रागिनी सिंह ने धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन से दूरभाष पर बातचीत कर सड़क की शीघ्र मरम्मत, प्रभावित क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने दोषी ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग उठाई।
भारी वाहनों के परिचालन समय में बदलाव का सुझाव
विधायक ने कहा कि जीतपुर क्षेत्र से बड़ी संख्या में भारी वाहन गुजरते हैं। संवेदनशील इलाके को देखते हुए भारी वाहनों के परिचालन के समय में बदलाव किया जाना चाहिए, ताकि दिन के समय आम नागरिकों और स्कूली बच्चों को परेशानी न हो और सड़क पर अतिरिक्त दबाव भी कम किया जा सके।
स्थायी समाधान की जरूरत
रागिनी सिंह ने कहा कि झरिया जैसे भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र में केवल सड़क निर्माण पर्याप्त नहीं है। निर्माण से पहले भू-वैज्ञानिक अध्ययन, भूमिगत गॉफ की स्थिति का आकलन और निर्माण के बाद नियमित तकनीकी निगरानी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि इन मानकों का पालन नहीं किया गया तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।
स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से अस्थायी मरम्मत के बजाय स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सुरक्षित और टिकाऊ सड़क चाहिए।

